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भारत में यहां खेली जाती है लहूलुहान कर देने वाली होली, ऐसी भयानक होली देखकर हो जाएंगे रोंगटे खड़े…

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Lसालों से है अनूठी परंपरा

डूंगरपुर के भीलूडा गांव में धुलंडी पर खुनी होली खेलने की सालों से अनूठी परम्परा है। इसे स्थानीय बोली में राड़ कहा जाता है। परंपरा के नाम पर लोग एक-दूसरे पर पत्थरों की बौछार कर लहूलुहान कर रहे हैं। कोई गुलेल से निशाना लगा रहा हैं तो कोई बड़े पत्थर के टुकड़े से हमले कर रहा हैं। सब का मकसद बस एक ही है। सामने वाले कितना लहुलुहान और घायल होता है। चोट लगनवे और घायल होने के बाद लोग विचलित नहीं होते हैं। इस खूनी खोली का नतीजा ये होता है कि पत्थरों की बौछार से कई लोग घायल हो जाते हैं, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया जाता है।

लहुलुहान होने को इस परंपरा में मानते हैं शुभ

सालों से चल रही इस परंपरा से किसी को भी कोई ऐतराज नहीं है बल्कि आपको जानकर ये हैरानी होगी कि होली के मौके पर लहुलुहान होने को इस परंपरा में शुभ मानते हैं। परंपरा के मुताबिक भीलूड़ा और आसपास के गांवों से आए लगभग 400 लोग प्रतिभागी के रूप में स्थानीय रघुनाथ मंदिर परिसर में एकत्रित होते हैं। जैसे ही यह खेल शुरू होता है वैसे ही हाथों में पत्थर, गोफन और ढाल लिये ये लोग दो टोलियों में बंट जाते हैं। होरिया के उद्घोष के साथ ही एक दूसरे की टोली पर पत्थर बरसाना प्रारंभ कर देते हैं। जिसे देखने ऊंची जगह पर हजारों लोगों की भीड़ जमा होती है। इस दिन चिकित्सालय में डाक्टरों का एक दल विशेष रूप से इस खेल के लिए ही तैनात रहता है।

जलती होलिका पर चलने की भी है परंपरा

दहकते अंगारों पर अगर गलती से पैर पड़ जाए तो लोगों की चीखें निकल जाती हैं, लेकिन डूंगरपुर के कोकापुर गांव में होली के मौके पर जलती होलिका पर चलने की परंपरा है। लोग दहकते अंगारे और शोलों के बीच नंगे पांव चलकर सदियों से चली आ रही परंपराओं का निर्वाह कर उत्साह मनाते हैं। मान्यता है कि दहकते अंगारों पर चलने से गांव पर कोई विपदा नहीं आती। वहीं, हजारों की संख्या में लोग पारम्परिक वेश भूषा में ढोल और कुण्डी की थाप पर होली के लोक गीतों पर गेर खेलते हैं।