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खतरा : राजधानी में फिर कांपी धरती, मंडरा रहा बड़े भूकम्प को खतरा…

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दिल्ली में आज एक बार फिर भूकंप का झटका महसूस किया गया है। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 2.1 रही। फिलहाल, किसी जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है। आज दोपहर को दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के झटके महसूस किए गए। पिछले दो महीनों में कई बार भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में इस बार भी भूकंप की तीव्रता ज्यादा नहीं थी। यह सिर्फ 2.1 थी। इससे पहले शुक्रवार को झारखंड और कर्नाटक में भी भूकंप आया था। कर्नाटक के हम्पी में सुबह 06:55 बजे रिक्टर स्केल पर 4.0 की तीव्रता के साथ भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। वहीं, झारखंड के जमशेदपुर में इसी समय रिक्टर स्केल पर 4.7 की तीव्रता वाला भूकंप आया।

दिल्ली-एनसीआर समेत समूचे उत्तर भारत में बीते एक-डेढ़ महीनों के दौरान एक दर्जन से अधिक छोटे भूकंप आए हैं। कोरोना संकट के बीच जब अधिकतर लोग घरों में थे तो बार-बार भूकंप के झटकों ने चिताएं बढ़ाईं लेकिन भूकंप विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे भूकंप से ज्यादा खतरा नहीं है बल्कि ये बड़े भूकंप के खतरे को कम कर सकते हैं। 

लगभग 60 फीसद अनियोजित तरीके से बसी दिल्ली में 80 फीसद इमारतें असुरक्षित हैं। ऐसे में भूकंप से ज्यादा भूकंप आने पर जानमाल का नुकसान होने का भय बना रहता है। गौरतलब है कि पिछले दो माह में दिल्ली-एनसीआर की धरती 10 बार हिल चुकी है। लंबे समय बाद भूकंप का केंद्र दिल्ली, फरीदाबाद, और रोहतक बन रहे हैं। -12 अप्रैल 2020: रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.5, केंद्र दिल्ली, गहराई 8 किलोमीटर। 
-13 अप्रैल 2020: रिक्टर स्केल पर तीव्रता 2.7, केंद्र दिल्ली, गहराई 5 किलोमीटर। 
-15 मई 2020: रिक्टर स्केल पर तीव्रता 2.2, केंद्र दिल्ली, गहराई 22 किलोमीटर। 
-28 मई 2020: रिक्टर स्केल पर तीव्रता 2.5, केंद्र फरीदाबाद, गहराई 10 किमी.
-29 मई 2020: रिक्टर स्केल पर तीव्रता 2.9, केंद्र रोहतक, गहराई 10 किलोमीटर। 
-29 मई 2020: रिक्टर स्केल पर तीव्रता 4.5, केंद्र रोहतक, गहराई 15 किलोमीटर। 
-1 जून 2020: रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.0, केंद्र रोहतक, गहराई 10 किलोमीटर। 
-1 जून 2020: रिक्टर स्केल पर तीव्रता 1.8,  केंद्र रोहतक, गहराई 5  किलोमीटर। 
-3 जून 2020: रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.0, केंद्र फरीदाबाद, गहराई 4 किलोमीटर। 
-8 जून 2020: रिक्टर स्केल पर तीव्रता 2.1, केंद्र दिल्ली-गुड़गांव बॉर्डर, गहराई 18 किलोमीटर। 

सूत्रों के अनुसार भूकंप के दुष्परिणामों को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने दिल्‍ली क्षेत्र की जमीन के नीचे की मिट्टी की जांच करवाकर यह पता किया है कि इसके कौन से क्षेत्र सबसे ज्‍यादा संवेदनशील हैं। जमीन के भीतर की संरचना पर होने वाले अध्‍ययन को भू-वैज्ञानिक सिस्‍मिक माइक्रोजोनेशन कहते हैं। उससे जानकारी मिलती है कि भूकंप के लिहाज से कौन से क्षेत्र सुरक्षित और खतरनाक हैं. दिल्ली की रिपोर्ट में साफ बताया गया है कि घनी आबादी वाले यमुनापार समेत तीन जोन सर्वाधिक खतरनाक हैं।