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महिलाएं गलती से भी ना पहनें इस रंग की चूड़ियां, सुहाग के साथ हो जाता है😱…

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चूड़ियाँ (Bangles) एक पारम्परिक गहना है जिसे भारत सहित दक्षिण एशिया में महिलाएँ कलाई में पहनती हैं। चूड़ियाँ वृत्त के आकार की होती हैं। चूड़ी नारी के हाथ का प्रमुख अलंकरण है, भारतीय सभ्यता और समाज में चूड़ियों का महत्वपूर्ण स्थान है। हिंदू समाज में यह सुहाग का चिह्न मानी जाती है। भारत में जीवितपतिका नारी का हाथ चूड़ी से रिक्त नहीं मिलेगा।

भारत के विभिन्न प्रांतों में विविध प्रकार की चूड़ी पहनने की प्रथा है। कहीं हाथीदाँत की, कहीं लाख की, कहीं पीतल की, कहीं प्लास्टिक की, कहीं काच की, आदि। आजकल सोने चाँदी की चूड़ी पहनने की प्रथा भी बढ़ रही है। इन सभी प्रकार की चूड़ियों में अपने विविध रंग रूपों और चमक दमक के कारण काच की चूड़ियों का महत्वपूर्ण स्थान है। सभी धर्मों एवं संप्रदायों की स्त्रियाँ काच की चूड़ियों का अधिक प्रयोग करने लगी हैं

।प्राचीन काल से ही चूड़ियां महिलाओं के सौंदर्य और सौभाग्य का प्रतीक रही हैं। चूड़ियां केवल सौन्दर्य ही नहीं बढ़ातीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य और मानसिक दशा को भी ठीक रखती हैं। ज्योतिष और आम जीवन में इनका प्रभाव बड़ा सूक्ष्म होता है, और ये मन पर सीधा असर डाल सकती हैं।

इस प्रकार की चूड़ियां ग्रहों पर, हमारे स्वास्थ्य और मन पर डालती हैं असर

चूड़ियां मुख्य रूप से गोल होती हैं जो कि बुध और चन्द्रमा का प्रतीक हैं।
वैवाहिक जीवन और सौंदर्य से सम्बन्ध रखने के कारण ये शुक्र का भी प्रतीक हैं।
मणिबंध पर्वत को स्पर्श करने के कारण यस स्वास्थ्य पर भी सीधा असर डालती हैं।
सही नियमों से अगर सही रंगों की चूड़ियां पहनीं जाएं तो वैवाहिक जीवन को सुखी किया जा सकता है।
चूड़ियां पहनने के नियम और सावधानियां

चूड़ियां शनिवार या मंगलवार को नहीं खरीदनी चाहिए।
पहनने के पूर्व चूड़ियां मां गौरी को जरूर समर्पित करें।
नई चूड़ियां प्रातः काल या संध्या काल ही पहनना शुरू करें।
अविवाहित होने पर किसी भी रंग की चूड़ियां पहनीं जा सकती हैं।
विवाहिता महिलाओं को काले रंग की चूड़ियां नहीं पहननी चाहिए
अगर विवाहिता महिलाओं को सफ़ेद चूड़ियां पहननी हैं तो साथ में लाल चूड़ियाँ जरूर पहनें।
महिलाओं को कांच की या सोने चांदी की ही चूड़ियां पहननी चाहिए।
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