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भारत से घबराया चीन , आनन फानन मे किया….

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नेपाल ने अपने नक्शे में आनन-फानन में बदलाव कर भारत के 3 इलाकों कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को अपना बताया और इन पर कब्जा करने का दावा भी ठोक दिया है।

वहीं चीन वायरस को लेकर दिए नेपाली पीएम के बेतुके बयान के बाद ये साफ हो चुका है कि जुबान भले ही उनकी है। लेकिन शब्द चीन के ही है। पर यहां ये गौर करने वाली बात है कि हिंदुस्तान के लिए ये तीनों इलाके धार्मिक लिहाज से ज्यादा सुरक्षा कारणों के लिए जरुरी है।

नेपाल जैसे दोस्त से बिगड़ते रिश्ते के बीच जमकर सियासत भी शुरु हो चुकी है। कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधा है और रिश्तों की तल्खी के लिए केन्द्र की विदेश नीति को जिम्मेदार बताया है।

कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्वीट कर लिखा, ‘क्या ऐसा कोई रास्ता है कि नेपाल के साथ मौजूदा रिश्तों को लेकर नेहरू पर आरोप लगाया जा सके? अगर है तो मैं सुनना चाहूंगा कि ये कैसे हुआ।

क्योंकि सभी अच्छे काम तो 2014 के बाद ही हुए हैं। सारे गलतियां या तो 1950 से 67 में हुई, या 1980-84, 2004 से 2014 के बीच। अद्भुत और अविश्वसनीय बेशर्मी!’

हालांकि नेपाल के इस कदम पर भारत ने भी जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि ‘हम नेपाल सरकार से अपील करते हैं कि वो ऐसे बनावटी कार्टोग्राफिक प्रकाशित करने से बचे।

साथ ही भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करे।’ लिपुलेख पर बन रही सड़क भारत के लिए हर लिहाज से बेहद जरुरी है।

इसलिए भारत ने यहां सड़क का निर्माण किया है। चीन को बात नागवार गुजर रही है और इसीलिए वो नेपाल के जरिए भारत पर अपनी खुन्नस निकाल रहा है।

नेपाल से भारत के ताजा सीमा विवाद का मामला गर्माता जा रहा है। भारत ने नेपाल को कड़े शब्दों में समझा दिया है कि बेवजह के विवाद से कोई फायदा नहीं।

नेपाल हिदुस्तान का सबसे भरोसेमंद और सांस्कृतिक तौर पर सबसे करीबी पड़ोसी था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। ड्रैगन की शह पर नेपाल ने भारत के खिलाफ बेहद खराब रवैया अख्तियार कर लिया है। इस मामले पर कांग्रेस भी अब केंद्र पर हमलावर हो गई है। हर कोई जानता है कि नेपाल की बागी तेवरों के पीछे चीन है।