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जानियें कैसे हुई प्रभु श्री राम की मृ’त्यु , क्या है इसके पीछें का राज…👇

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प्रभु राम ने पृथ्वी पर दस हजार से भी ज्यादा वर्षो तक राज किया है। अपने इस लम्बे शासन काल में भगवान राम ने कई महान कार्य किये है। जिन्होंने हिन्दू धर्म को एक गौरवमयी इतिहास प्रदान किया है।फिर कैसे भगवान श्री राम इस दुनिया से लो’प हो गए ? वह क्या कारण था की उन्हें अपने परिवार को छोड़ विष्णुलोक वापस जाना पड़ा। अर्थात प्रभु श्रीराम की मृ’त्यु कैसे हुई ?

का’लदेव का आगमन
पदम् पुराण में दर्ज एक कथा के अनुसार एक दिन एक वृद्ध संत भगवान श्रीराम के दरबार में पहुंचे। और उनसे अकेले में चर्चा करने का निवेदन किया। उस संत की पुकार सुनते हुए प्रभु राम उन्हें एक कक्ष में ले गए। और द्वार पर अपने छोटे भाई लक्ष्मण को खड़ा कर दिया। और कहा यदि उनके और उस संत की चर्चा को किसी ने भं’ग करने की कोशिश की तो उसे वो स्वंय मृ’त्यु दंड देंगे। लक्ष्मण में अपने श्रेष्ट भ्राता की आज्ञा का पालन करते हुए दोनों को उस कमरे में एकांत में छोड़ दिया और खुद बाहर पहरा देने लगे। वह वृद्ध संत कोई और नहीं बल्कि विष्णुलोक से भेजे गए का’लदेव थे। जिन्हे प्रभु राम को ये बताने के लिए भेजा गया था की उनका धरती पर जीवन पूरा हो चूका है और अब उन्हें अपने लोक वापस लौटना होगा।

श्री राम की प्रतिज्ञा
उसी समय अचानक द्वार पर ऋषि दु’र्वाशा आ गए। उन्होंने लक्ष्मण से भगवान राम से मिलने का निवेदन किया। लेकिन उन्होंने श्रीराम की आज्ञा का पालन करते हुए ऋषि दुर्वाशा को अंदर जाने से रोक दिया। ऋषि दुर्वाशा हमेशा से ही अपने क्रो’ध के लिए जाने जाते हैं। लक्ष्मण के बार-बार मना करने पर ऋषि दुर्वाशा को क्रो’ध आ गया और उन्होंने कहा अगर तुमने मुझे अंदर नहीं जाने दिया तो में राम को श्रा’प दे दूंगा। यह सुनकर लक्ष्मण घ’बरा गए। उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था की वो अपने भाई की आज्ञा का पालन करे या फिर उन्हें श्रा’प मिलाने से बचाएं। लक्ष्मण कभी भी ये नहीं चाहते थे की उनके कारण उनके बड़े भाई को कोई हानि’ पहुंचे। इसलिए लक्ष्मण ने मृ’त्युदं’ड की सजा भुगतने का फै’सला किया ताकि श्री राम को ऋषि दु’र्वा’शा के श्रा’प से बचाया जा सके।

लक्ष्मण का दे’ह त्याग
उसके बाद लक्ष्मण ने कक्ष के भीतर प्रवेश किया। लक्ष्मण को का’श में देख प्रभु श्री राम धर्मसंकट में पड़ गए। अब एक तरफ वो अपनी प्रतिज्ञा के कारण मजबूर थे तो दूसरी तरफ भाई से प्रेम के कारण खुद को निस’हाय महसूस कर रहे थे। उस समय प्रभु श्री राम ने लक्ष्मण को मृ’त्यु’दंड देने के स्थान पर राज्य एवं देश से बाहर निकल जाने को कहा। उस युग में देश निकला ,मृ’त्युदं’ड के समान ही माना जाता था। लेकिन लक्ष्मण जो अपने भाई राम के बिना एक क्षण भी नहीं रहते थे उन्होंने इस दुनिया को छोड़ देने का निर्णय लिया और सरयू नदी में जाकर अपने दे’ह त्याग दिए। और शेषनाग के रूप में परिवर्तित होकर विष्णुलोक को चले गए।

प्रभु श्री राम की जलसमाधि
यह बात जब प्रभु श्रीराम को पता चला तो उ’दास हो गए। उसके बाद प्रभु श्री राम ने भी इस लोक से जाने का मन बना लिया। फिर श्री राम ने अपना राजपाठ अपने पुत्र और भाई के पुत्रों को सौंप दिया। और सरयू नदी की ओर चल दिए। वहां पहुंचकर प्रभु श्री राम नदी के अंदर चले गए फिर कुछ देर नदी के भीतर से भगवान विष्णु प्रकट हुए। और उन्होंने अपने भक्तों को दर्शन दिए। इस प्रकार से श्री राम ने अपना मानवीय रूप त्याग कर अपना वास्तविक स्वरुप धारण किया और वैकुण्ठ की और प्रस्थान किया।