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Chanakya Niti: इन 4 बातों से व्‍यक्ति बनाए दूरी, वरना मुश्कि’ल में पड़ सकता है जीवन

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Chanakya Niti: आचार्य चाण’क्य (Acharya Chanakya) सज्जन पुरुष की पहचान बताते हुए कहा है कि ऐसे लोग प्रलय के समान भयं’कर हालात में भी अपनी मर्यादा नहीं बदलते.

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) एक कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में जाने जाते हैं. उनकी कुशाग्र बुद्धि और तार्किकता से सभी प्रभावित थे. इसी कारण वह कौटिल्य (Kautilya) कहे जाने लगे. उन्‍होंने नीति शास्त्र में अपने ज्ञान और अनुभव के आधार पर जहां जीवन की हर परि’स्थिति का सामना करना और सुख दुख में विचलित न होने के लिए कई मह’त्‍वपूर्ण बातें बताई हैं, वहीं उन्‍होंने सज्जन पुरुष की पहचान बताते हुए कहा है कि प्रलय के समान भयं’कर विपत्ति में भी अपनी मर्यादा नहीं बदलते. चाणक्य नीति में आचार्य चाण’क्य द्वारा वर्णित नीतियां आज भी प्रासं’गिक हैं. आइए जानते हैं आचार्य चाणक्य की बताई गई ये मह’त्‍वपूर्ण बातें-

सज्जन हालात का करते हैं सामना 

चाणक्‍य नीति कहती है कि जब प्रलय का समय आता है, तो समुद्र भी अपनी मर्यादा छोड़कर किनारों को छोड़ अथवा तोड़ जाते है, लेकिन सज्जन पुरुष प्रलय का सामना भयंकर परिस्थि’तियों में भी करते हैं और अपनी मर्यादा नहीं बदलते.

विद्या के बिना व्‍यक्ति कुछ नहीं

आचार्य चाण’क्‍य के अनुसार रूप और यौवन से सम्पन्न और कुलीन परिवार में जन्म लेने पर भी जिस व्‍यक्ति के पास विद्या नहीं है, वह पु’रुष पलाश के फूल के समान है, जो सुन्दर तो है लेकिन खुशबू रहित है.

एक ही पुष्‍प काफी है
चाणक्‍य नीति के अनु’सार जिस तरह सारा वन केवल एक ही पुष्प और सुगंध भरे वृक्ष से महक जाता है, उसी तरह एक ही गुण’वान पुत्र पूरे कुल का नाम बढ़ाता है. वह कहते हैं कि इसी तरह केवल एक सूखा हुआ जलता वृक्ष सम्पू’र्ण वन को जला देता है, उसी प्रकार एक ही कुपुत्र सारे कुल की मान, मर्यादा और प्रति’ष्ठा को नष्ट कर देता है.

इन हालात में रहें दूर
चाण’क्‍य नीति कहती है कि वह व्यक्ति सुर’क्षित रह सकता है, जो ये परिस्थि’तियां उत्पन्न होने पर भाग जाए- भयावह आपदा में, विदेशी आक्र’मण के समय, भयं’कर अकाल की स्थिति में और दु’ष्‍ट व्यक्ति का साथ मिलने पर.

पुत्र से मित्र के समान व्‍यवहार
चाण’क्‍य नीति के अनु’सार पांच साल तक पुत्र का लाड़ और प्यार से पालन करना चाहिए. वहीं दस साल तक उसे छड़ी की मार से डराएं, लेकिन जब वह 16 साल का हो जाए, तो उससे मित्र के समान व्‍यव’हार करना चाहिए.