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इ’न 4 ची’जों से व्य’क्ति बना’ए दू’री, वर’ना मुश्कि’ल में प’ड़ स’कता है जी’वन, जा’निए…

धार्मिक खबर

Chanakya Niti: आचा’र्य चा’णक्य (Acharya Chanakya) ए’क कुश’ल राजनी’तिज्ञ, चतु’र कूटनी’तिज्ञ, प्रकां’ड अर्थशा’स्त्री के रू’प में जा’ने जा’ते हैं. उन’की कु’शाग्र बु’द्धि औ’र तार्कि’कता से स’भी प्रभा’वित थे. इ’सी कार’ण व’ह कौ’टिल्य (Kautilya) क’हे जा’ने ल’गे. उन्‍हों’ने नी’ति शा’स्त्र में अ’पने ज्ञा’न औ’र अ’नुभव के आ’धार प’र ज’हां जीव’न की ह’र परि’स्थिति का सा’मना कर’ना औ’र सु’ख दु’ख में विच’लित न हो’ने के लि’ए क’ई मह’त्‍वपूर्ण बा’तें ब’ताई हैं, व’हीं उन्‍हों’ने स’ज्जन पु’रुष की पह’चान बता’ते हु’ए क’हा है कि प्र’लय के समा’न भयं’कर विप’त्ति में भी अ’पनी म’र्यादा न’हीं बद’लते. चाण’क्य नी’ति में आ’चार्य चा’णक्य द्वा’रा वर्णि’त नी’तियां आ’ज भी प्रासं’गिक हैं. आ’इए जा’नते हैं आचा’र्य चाण”क्य की ब’ताई ग’ई ये म’हत्‍वपूर्ण बा’तें-

सज्ज’न हा’लात का कर’ते हैं साम’ना 
चाण’क्‍य नी’ति कह’ती है कि ज’ब प्रल’य का सम’य आ’ता है, तो स’मुद्र भी अ’पनी मर्या’दा छोड़’कर कि’नारों को छो’ड़ अ’थवा तो’ड़ जा’ते है, ले’किन सज्ज’न पु’रुष प्र’लय का सा’मना भयं’कर परि’स्थितियों में भी क’रते हैं औ’र अप’नी मर्या’दा न’हीं बद’लते.


वि’द्या के बि’ना व्‍य’क्ति कु’छ न’हीं


आ’चार्य चा’णक्‍य के अनु’सार रू’प औ’र यौव’न से स’म्पन्न औ’र कु’लीन परि’वार में ज’न्म ले’ने प’र भी जि’स व्‍य’क्ति के पा’स वि’द्या न’हीं है, व’ह पुरु’ष प’लाश के फू’ल के समा’न है, जो सुन्द’र तो है ले’किन खु’शबू रहि’त है.