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सोम’वार के दि’न भग’वान शि’व को स’मर्पित क’रें ये ची’जें, क’ष्टों से मि’लेगी मु’क्ति, ह’र मनो’कामना हो’गी पू’री…

धार्मिक खबर

सोमवार का दिन भगवा’न शि’व को सम’र्पित है. ऐसे में कहा जाता है कि अगर सोमवार को भगवान शि’व की स’च्चे मन से पूजा की जाए तो सारे क’ष्टों से मु’क्ति मिलती है और सभी मनो’कामना पूरी होती है. शि’व सदा अपने भ’क्तों पर कृ’पा ब’रसाते हैं. मा’न्यता है कि भगवान शि’व को खु’श करने के लिए सोमवार को सुबह उठ’कर स्ना’न करके भग’वान शि’व की आरा’धना कर’नी चाहिए. ऐ’सी मा’न्यता है कि इ’स दिन स’च्चे मन से भो’ले भग’वान की पू’जा करने से सभी मनोका’मनाएं पूरी होती हैं. भगवान शि’व को स्व’यंभू कहा जाता है जिस’का अ’र्थ है कि वह अ’जन्मा हैं. वह ना आदि हैं और ना अं’त. भोले’नाथ को अ’जन्मा और अवि’नाशी कहा जा’ता है. भगवा’न शि’व सृ’ष्टि के सं’हारक हैं. उ’नके संहा’रक स्व’रूप को रु’द्र कहा गया है. रु’द्र के 11 रू’प की कथा वे’दों-पुरा’णों में वर्णि’त है. आइए आप’को बताते हैं भग’वान शि’व के रुद्र रू’पों के बा’रे में.

मा‘न्यता है कि भगवान शि’व को खु’श करने के लिए सोमवार को सुबह उठ’कर स्ना’न करके भग’वान शि’व की आरा’धना कर’नी चाहिए. ऐ’सी मा’न्यता है कि इ’स दिन स’च्चे मन से भो’ले भग’वान की पू’जा करने से सभी मनोका’मनाएं पूरी होती हैं. भगवान शि’व को स्व’यंभू कहा जाता है जिस’का अ’र्थ है कि वह अ’जन्मा हैं. वह ना आदि हैं और ना अं’त. भोले’नाथ को अ’जन्मा और अवि’नाशी कहा जा’ता है.