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न’ए सा’ल के दि’न क’रें ये अ’चूक उ’पाय, ध’न प्रा’प्ति के सा’थ बड़े’गी तर’क्की, पू’री सा’ल रहे’गे…

धार्मिक खबर

न’ए सा’ल को आ’ने में अ’ब कु’छ ही दि’न बा’की है। सा’ल 2021 को लेक’र लो’गों में उत्सा’ह औ’र उ’मंग हैं। ह’र को’ई चाह’ता है कि न’या सा’ल उस’के लि’ए न’ई खु’शियां औ’र सौ’गात लेक’र आ’ए। ऐ’से में ह’म आप’को ब’ता र’हे हैं कि ध’न प्रा’प्ति, त’रक्की औ’र मा’न-सम्मा’न प्रा’प्ति के लि’ए वा’स्तु शा’स्त्र के कु’छ अ’चूक उ’पाय। जि’न्हें अप’नाकर आ’प अ’पना जी’वन बेह’तर ब’ना सक’ते हैं। जा’निए उ’पाय- 

. वा’स्तु शा’स्त्र के अ’नुसार, घ’रों में लो’ग न’ल अ’थवा टंकि’यों से अ’नावश्यक ब’हता पा’नी शु’भ न’हीं मा’ना जा’ता है। क’हते हैं कि जि’स घ’र में ऐ’सा हो’ता है, व’हां बर’कत न’हीं हो’ती है। इस’के अला’वा बेव’जह ध’न ख’र्च हो’ता है।

2. वा’स्तु शा’स्त्र के अ’नुसार, परि’वार में शां’ति औ’र खुश’हाली के लि’ए न’ल के पा’नी का प्रवा’ह ह’मेशा उ’त्तर-पू’र्व दि’शा की ओ’र क’रना चा’हिए।

3. क’हते हैं कि पौ’धों को ह’र दि’न पा’नी दे’ने से ध’न प्रा’प्ति के यो’ग ब’नते हैं औ’र परि’वार के स’दस्यों के बी’च भाई’चारा ब’ना रह’ता है।

4. वा’स्तु शा’स्त्र के अनु’सार, छ’त प’र द’क्षिण-प’श्चिम दि’शा की ओ’र से पा’नी की टं’की लगा’ना शु’भ मा’ना जा’ता है।

5. वा’स्तु में क’हा ग’या है कि व्य’क्ति को हमे’शा स्व’स्थ और खुश’हाल रह’ने के लि’ए सि’र द’क्षिण औ’र पै’र उ’त्तर दि’शा की ओ’र क’रके सो’ना चाहि’ए। क’हते हैं कि इ’स दि’शा में सो’ना से ध’न, खु’शी औ’र समृ’द्धि की प्रा’प्ति हो’ती है।

6. वा’स्तु शा’स्त्र के अनु’सार, घ’र में उत्त’र-पू’र्व या पू’र्व दि’शा में बैठ’कर खा’ने की व्य’वस्था कर’ना शु’भ हो’ता है। क’हते हैं कि ऐ’सा क’रने से घ’र में सु’ख-स’मृद्धि आ’ती है।

7.  क’हते हैं कि पू’र्व दि’शा की ओ’र मु’ख कर’के भो’जन क’रने से संप’न्नता आ’ती है। द’क्षिण दि’शा की ओ’र मु’ख क’रके क’भी भोज’न न’हीं कर’ना चा’हिए।

8. घ’र या ऑ’फिस में पू’जा का स्था’न हमे’शा ई’शान को’ण में ही क’रना चा’हिए। वा’स्तु शा’स्त्र के अनु’सार, ऐ’सा कर’ने से परि’वार में खुशहा’ली औ’र स’मृद्धि आ’ती है।

9. क’हा जा’ता है कि पू’जा घ’र में शं’ख ज’रूर रख’ना चा’हिए। मान्य’ता है कि ऐ’सा क’रने से घ’र में शां’ति औ’र खुश’हाती आ’ती है।

10. वा’स्तु शा’स्त्र के अ’नुसार, द’क्षिण-प’श्चिम दि’शा में क’भी मं’दिर न’हीं बन’वाना चाहि’ए। जि’स घ’र में ऐ’सा हो’ता है व’हां बर’कत न’हीं आ’ती है।