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दिवा’ली प’र भू’ल क’र भी ना ला’एं ल’क्ष्मी मां की ऐ’सी मू’र्ति-तस्वी’र, ता’उम्र रहें’गे परे’शान….

धार्मिक खबर

लख’नऊ: अ’गर आ’प इ’स दीपा’वली के मौ’के प’र मां ल’क्ष्मी की मू’र्ति या तस्वी’र खरी’दकर घ’र ला’ने के बा’रें में सो’च र’हे हैं तो ये ख’बर आप’के लि’ए बेह’द उप’योगी साबि’त हो सक’ती है।

अ’गर आ’प नी’चे ब’ताई ग’ई बा’तों प’र अम’ल न’हीं कर’ते हैं तो नि’श्चित तौ’र प’र आ’प प’रेशान रहें’गे। आ’पके पा’स ध’न तो आये’गा ले’किन आ’प चाह’कर भी उस’का सं’चय न’हीं क’र पाएं’गे।

मां ल’क्ष्मी की न’ई तस्वी’र या मू’र्ति ला’ने से पह’ले कु’छ बा’तों का ज’रूर ध्या’न रख’ना चा’हिए। मां ल’क्ष्मी से जु’ड़ी ह’र ची’ज का अ’पना म’हत्व औ’र प्रभा’व है।

चलि’ए जान’ते हैं दि’वाली की पू’जा में मां ल’क्ष्मी की कै’सी मू’र्ति या चि’त्र की पू’जा क’रनी चा’हिए औ’र कि’न गल’तियों को कर’ने से ह’में बच’ना चा’हिए।

ल’क्ष्मी जी के सा’थ गणे’श व सर’स्वती जी का पूज’न ला’भप्रद

जन’मानस के बी’च ऐ’सी मान्य’ता है कि क’भी भी अके’ले ल’क्ष्मी मां के चि’त्र का पूज’न न’हीं कर’ना चा’हिए। हमे’शा उ’नके सा’थ गणे’श व सर’स्वती का पू’जन ला’भप्रद हो’ता है। इ’स तर’ह ध’न, वि’द्या व शुभ’ता की प्रा’प्ति ए’क सा’थ हो जा’ती है।

य’दि चि’त्र में मा’ता ल’क्ष्मी मु’स्कुरा र’ही है तो आ’प स’दा उन’से आ’शीर्वाद ए’वं ध’न प्रा’प्त क’रेंगे। दे’वी-देव’ताओं की रौ’द्र रू’प वा’ली तस्वी’रें घ’र में निगे’टिविटी का संचा’र कर’ती हैं।

ध्या’न र’खें कि ज’ब भी मां ल’क्ष्मी का पू’जन वि’ष्णु जी ए’वं ग’णेश जी के सा’थ क’रें तो ग’णेश जी ल’क्ष्मी जी के दा’हिने औ’र ए’वं वि’ष्णु जी ल’क्ष्मी जी के बा’एं में ही हो’ने चा’हिए। स’ही तरी’के से पू’जन कर’ने से मा’ता ल’क्ष्मी खु’श हो’ती है औ’र उन’की कृ’पा प्रा’प्त हो’ती है।

ह’में क’भी भी ऐ’सी तस्वी’र न’हीं ले’नी चा’हिए जिस’में मां ल’क्ष्मी उ’ल्लू प’र बै’ठी हों। इस’से घ’र में नका’रात्मक ऊ’र्जा आ’ती है। उ’ल्लू वा’हन से आ’ई ल’क्ष्मी ग’लत दि’शा से आ’ने वा’ली औ’र जा’ने वा’ली ध’न का सं’केत क’रती है। क’भी भी पू’जा स्थ’ल में ल’क्ष्मी मां की दो मू’र्तियां न’हीं र’खनी चाहि’ए। ल’क्ष्मी मां की दो मू’र्तियां आ’स-पा’स तो क’त्तई न’हीं रख’नी चा’हिए। ऐ’सा क’रने प’र घ’र में झग’ड़ा हो’ता है।

मां ल’क्ष्मी के हा’थ से गि’रते हु’ए सि’क्के वा’ली त’स्वीर ज’रूर ख’रीदें

जि’स फो’टो में मां ल’क्ष्मी के हा’थ से गिर’ते हु’ए सि’क्के दि’खें, ह’में व’हीं फो’टो खरी’दनी चा’हिए, क्यों’कि इ’ससे वैभ’व का वर’दान मिल’ता है। गिर’ते सि’क्कों का म’तलब है- ह’र दि’शा में संप’न्नता। सो’ने के सि’क्के के’वल ध’न औ’र वैभ’व का ही प्रती’क न’हीं है, इस’का वि’स्तृत अ’र्थ ह’र तर’ह की सं’पन्नता से है। सि’क्के कि’सी बर्त’न या पा’त्र में गि’र र’हे हों तो अ’च्छा है

अग’र फो’टो के अंद’र मा’ता के दो’नों ओ’र ऐ’रावत हा’थी मौ’जूद हों औ’र ध’न की व’र्षा क’र र’हे हो तो इस’से घ’र में क’भी ध’न की क’मी न’हीं हो’ती है। ठी’क उ’सी तर’ह य’दि सूं’ड में क’लश लि’ए हु’ए हा’थी हो तो शु’भ मा’ना जा’ता है। अग’र हा’थी पा’नी में ख’ड़े हों औ’र सि’क्के बर’सा र’हे हों तो य’ह ब’हुत शु’भ मा’ना जा’ता है।

ल’क्ष्मी मां के ऊप’र हा’थियों द्वा’रा पा’नी फेंक’ने वा’ली तस्वी’र ला’ये घ’र

ध्या’न दे’ने वा’ली बा’त ये है कि कु’छ तस्वी’रों में ल’क्ष्मी मां के ऊ’पर हा’थियों को पा’नी फें’कते हु’ए दि’खाया जा’ता है। ये 4 हा’थी चा’र दि’शाओं का प्रति’निधित्व क’रते हैं। स’फेद रं’ग के हा’थी पवि’त्रता का प्रती’क हैं। हिं’दू मान्यता’ओं में, हा’थी को बुद्धिमा’नी का प्र’तीक भी मा’ना जा’ता है।

अक्स’र ध’न की प्रा’प्ति के बा’द लो’ग गल’त रा’स्ते प’र च’लने ल’गते हैं इसीलि’ए ध’न के सा’थ बु’द्धि का मे’ल ज’रूरी है। वै’भव औ’र संप’त्ति सुफ’ल हो, इस’के लि’ए आप’को ऐ’सी फो’टो घ’र में अ’वश्य र’खनी चा’हिए।