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खाना खाने का क्या है सही तरीका, शा’स्त्रों में क्या दिए गए है नि’यम जान कर चौ’क जाएंगे आप…

भार’तीय परंपरा में भो’जन को भगवान का द’र्जा प्रा’प्त है। कहा जाता है कि भो’जन यदि सही तरी’के से किया जाए तो न सिर्फ वो हमें पो’षण देता है अ’पितु उससे हमारी आयु में भी वृ’द्धि होती है। शा’स्त्रों में भो’जन को लेकर कई तरी’के बताए गए हैं, जिनसे स्वा’स्थ्य पर स’कारात्मक और न’कारात्मक अ’सर भी पड़ता है। खाना खाते समय यदि कुछ नियमों का पा’लन हम करें तो आ’श्चर्य जनक अच्छे प:रिणाम मिलते है। ज्योति’षाचार्या सा’क्षी शर्मा के अ’नुसार भो’जन कैसे करना चाहिये आइये जा:नते है।

भोजन करने के लिये उचित दि’शा:

वा:स्तु शा’स्त्र में भोजन करने के लिये पू’र्व दि’शा को श्रे’ष्ठ माना गया है। भो’जन करते स’मय मुं’ह उ’त्तर दिशा की ओर भी कि’या जा सकता है। ऐसा करने से शरीर को भोजन से प्रा’प्त ऊर्जा पूरी तरह से मिलती है। द’क्षिण दि’शा की ओर मुं’ह करके भो’जन करना अशुभ और पश्चिम दिशा की ओर मुंह करने से बीमा’रियों में वृ’द्धि होती है।

आयु वृ’द्धि हेतु भो’जन कैसे करें:

भार’तीय सं’स्कृति में भोजन से पू’र्व हाथ धोने का प्रावधान है। खाना खाने से पूर्व यदि दोनों हाथ, दोनों पैर और मुं’ह को धो’या जाए तो आयु में वृ’द्धि हो सकती है। मान्य’ता के अनुसार गीले पैरों के साथ भो’जन करने से स्वा’स्थ्य सं’बंधी लाभ होता है और उ’म्र में वृद्धि होती है।

भो’जन में क्या है व’र्जित:

भोजन न तो बिस्तर पर बैठ’कर और न ही प्लेट हा’थ में पकड़कर करना चाहिये। भो’जन हमे’शा आ’राम से बैठ कर करना चाहिए। भोजन की थाली ल:कड़ी की चौकी पर रखें और बर्तन सा’फ-सु’थरे होने चा’हिए। टूटे बर्तनों में भोजन करना अ’शुभ माना जाता है।

प्रभु का स्म’रण:

भोजन करने से पूर्व अन्न दे’वता, अन्न’पूर्णा मा’ता और देवी-देवताओं का स्म’रण कर उन्हें धन्यवाद करें। भो’जन स्वा’दिष्ट न लगने पर उसका तिर’स्कार न करें। ऐसा करने से अन्न का अपमान होता है। अपने भो’जन में से गाय, कु’त्ते और प’क्षियों को कुछ नि’वाले ज’रूर दे ऐसा करने से घर में बर’कत आती है।

भोजन बनाने की विधि:

भो’जन बनाने वाले व्य’क्ति को स्नान कर’के और पू’री तरह से पवि’त्र होकर ही भोज’न बना’ना चा’हिए। भोजन बनाते समय मन शांत रखना चाहिए। जहां तक हो सके भो’जन बना’ते समय अपने परि’वार के स्व’स्थ रहने के वि’चार करें या मं’त्र जप अथवा स्तोत्र पाठ करते रहें। भोजन करते समय हमारे मन में किसी भी व्यक्ति के प्रति ई’र्ष्या का भा’व नहीं होना चाहिए।