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वैष्णो देवी जा रहे हैं तो इन मंदिरों के दर्शन करना न भूलें, मिलेगा पुण्य लाभ…

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जम्मू: श्र’द्धा और आ’स्था से प’रि’पूर्ण वै’ष्णो दे’वी की यात्रा को जाने वाले हर श्र’द्धालु की अ’भिला’षा होती है कि वह हर उस स्थान पर नमन करते हुए माता के द’रबा’र तक प’हुंचे, जहां पर कभी मां भ’ग’वती ने वि’श्राम किया था. को’ल कं’डोली, दे’वा माई, भू’मिका मं’दिर, द’र्शनी ड्योढ़ी, बा’ण गंगा, चरण पा’दुका, अर्द्धकुंवारी, भै’रों मंदिर आदि ऐसे प’ड़ा’व हैं, जो वै’ष्णो देवी यात्रा का प्र”मुख हिस्सा हैं. आज हम आपको भू’मिका मंदिर का महत्व बताएंगे

भू’मिका मंदिर
वैष्णो देवी की यात्रा जहां से शुरू होती है उसके स’बसे पहले प’ड़ाव में भूमिका मंदिर है. इस मंदिर में माता वैष्णो देवी जी ने अपने परम भक्त को दर्शन दिए थे. माता के ही आ’शीर्वाद से उनके भक्त का उद्धार हुआ था. इस मंदिर की मान्यता है कि जो श्रद्धालु मां वैष्णो देवी जी के दर्शनों के बाद यहां आकर कन्या पूजन करता है तो मां भ’गवती उसकी सभी मनो’काम’ना पूरी करती है. प्राचीनकाल से ही इस तीर्थ स्थल का विशेष महत्व है. आज 
भी जो श्रद्धालु इस पवित्र स्थल के महत्व के बारे में जानते हैं, वह मां वैष्णो देवी के दर्शनों के बाद भू’मिका मं’दिर में माथा टे’कक’र कन्या पूजन करते हैं. इसके उ’परां’त ही श्र’द्धालु अपनी यात्रा को सं’पूर्ण मानते हैं.

पौ’राणिक कथा के अ’नुसार एक दिन बाबा श्री’धर को मां वैष्णवी ने एक दिव्य कन्या के रूप में दर्शन दिए. मां ने उन्हें आ’देश दिया कि वह भंडारे का आ’योजन करें तथा उसमें सभी वि’द्वानों व ब्राह्मणों को आ’मंत्रित करें. मां के आ’देश अनु’सार श्रीधर भंडारे के आ’योजन में जुट गए. उसके बाद नगर के विद्वानों तथा ब्रा’ह्मणों को आ’मंत्रित करने पहुंचे, लेकिन उनको चिं’ता सता रही थी कि वे भं’डारे में भोजन की व्य’वस्था कैसे करेंगे. सु’बह जब वह उठे तो भंडा’रे की व्यवस्था देख दंग रह गए. भंडा’रा शुरू हुआ और श्रीधर ब्रा’ह्मणों को भो’जन प’रोसने में जुट गए. 

कहा जा’ता है कि भै’रो ना’थ भी अपने शि’ष्यों के साथ भं’डारे में पहुंचा. उसने श्री’धर व कन्या रूपी मां वै’ष्णवी से मां’स व म’दिरा की मांग की. माता ने जब मांस मदिरा देने से इं’कार किया तो भैरो नाथ मा’ता के साथ अ’भद्र व्य’वहार पर उ’तारू हो गया. इसी का’रण मां वै’ष्णो वहां से अं’तरध्या’न हो’क’र त्रि’कुटा पर्व’त की ओर प्र’स्था’न कर गई.