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मंगलवार के दिन जपलो सुन्दरकाण्ड की ये 2चोपाई…होगा हर संकट का अंत…खुशियाँ लौटेगी तुरंत!

धार्मिक खबर

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर ! जय कपीस तिहूँ लोक उजागर !
रामदूत अतुलित बल धामा ! अंजनी-पुत्र पवनसुत नामा !

दोस्तों महावीर बजरंग बलि जी की ये चोपाई तो आपने सुनी ही होगी ! हनुमान जी ही ऐसे देवता है जो कलयुग में जीवित है और अपने भक्तो का दुःख दूर करने के लिए स्वय प्रकट हो जाते है ! इसीलिए उन्हें संकट मोचन भी कहा जाता है ! आप सब जानते है की मंगलवार का दिन हनुमान जी का दिन होता है इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से मनवांछित फल मिलता है ! लेकिन आज हम आपको सुन्दर काण्ड की 2 चमत्कारी चोपायियों के वारे में बतायेंगे जिनका जाप करने या केवल सुनने से ही व्यक्ति के जीवन का हर दुःख दूर हो जाता है ! तो चलिए जानते है….

सुन्दरकाण्ड एक अध्याय है जो श्री प्रभु श्री राम के भक्त हनुमान के विजय का काण्ड है जो भी व्यक्ति सुन्दरकाण्ड का पाठ करता है उसकी मानसिक शक्ति और आत्मविश्वाश बढ़ता है वैसे तो सुन्दरकाण्ड की हर एक चोपाई बहुत ही प्रभावशाली और चमत्कारी है लेकिन शाश्त्रो के अनुसार यह 2 चोपायियाँ ऐसी है जिनको जपने का फल तुरंत मिल जाता है इनका जाप करने से आपके जीवन की सारी कठिनाईया दूर हो जाती है इनका प्रभाव इतना शक्तिशाली होता है कि बड़े से बड़ा संकट भी आने से पहले ही दूर हो जाता है ! मान्यता है जब कोई व्यक्ति अपने जीवन से निराश हो जाये, उसका आत्मविशवास चला जाए, बहुत कोशिश करने पर भी उसका कोई काम न बने तो श्री सुन्दरकाण्ड की इन 2 चमत्कारी चोपायिंयों का नियमित रूप से जाप करने से उसके जीवन का हर संकट शीघ्र ही दूर हो जाता है ! उसका हर बिगड़ा काम अपने आप बनने लगता है, उसे हर कार्य में सफलता मिलती है ! और मनवांछित फल प्राप्त होता है ! सबसे पहली चोपाई है

प्रबिसि नगर की जेसब कीजे, हिर्दय राखी कोसलपुर राजा !!
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई ! गोपद सिन्धु अनल सितलाई !!

इसका मतलब है कोई भी कार्य करने से पहले श्री राम का स्मरण करने से उस कार्य में सफलता प्राप्त होती है जो कोई भी ऐसा करता है उसके लिए विष भी अमृत के सामान हो जाता है, अग्नि में शीतलता आ जाती है , उसके शत्रु मित्र बन जाते है, समुन्द्र गाय के खुर के सामान हो जाता है धार्मिक ग्रंथो के अनुसार ऐसा माना जाता है जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका गए तो उन्हें इस कार्य में शंका होने लगी तव उन्होंने श्री राम का स्मरण किया फिर लंका में परवेश किया और अपने काम से सफल हुए ! इसी कारण से ऐसा माना जाता है कि इस चोपाई के जाप करने से और श्री राम का स्मरण करने से हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है !

हनुमान अंगद रन गाजे ! हांक सुनत रजनीचर भाजे !

दूसरी चोपाई है ……

इस चोपाई का अर्थ है कि राम रावण युद्ध में हनुमान और अंगद रुपी सद्गुणी शक्तियों के भय और आक्रमण से रजनीचर यानी रक्षाशो जैसी बुरी शक्तियां मैदान छोड़ कर भाग गयी ! व्यवहारी जीवन में भी महावीर हनुमान जी के स्मरण से राक्षस रुपी भय,परेशानी बुरे भाव, डर और चिंता का अंत होता है जो भक्त सच्चे मन से हनुमान जी की पूजा करते है उन्हें हनुमान जी के साथ श्री राम की अपार कृपा मिलती है ! जय श्री राम