Categories
News

फेयरनेस क्रीम लगाने वाले हो जाएं साव’धान, एक बार जरूर पढ़ें ये खबर….

हिंदी खबर

क्रीम लगाकर आप सांवले से गोरे कैसे हो जाते हैं?
फेयरनेस का दा’वा करने वाली क्री’म एक सीमा है और स्थायी तौर पर वो त्वचा की रंग’त नहीं बदल सकतीं, बल्कि इनके लंबे इस्तेमा’ल से त्वचा को नुक’सान भी हो सकता है


एशिया को ब्यूटी प्रॉ’डक्ट्स का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है. गोरा करने वाली क्रीम यहां बिकती भी खूब हैं. जो शर्ति’या गोरा करने का दावा करती हैं. कहना गलत नहीं होगा कि दुनियाभर में गोरेपन को लेकर ज’बरदस्त दीवा’नगी है. क्रीम से लेकर साबुन और पा’उडर तक सभी गोरे’पन के साथ चेहरे के दाग-ध’ब्बे-काली झाइयां दूर करने का दावा करते हैं. ये प्रॉडक्ट्स गांव से लेकर शहरों तक खूब बिकते भी हैं.
गोरी त्वचा के साथ भारत का लगाव ब्रिटिश शासन के बाद शुरू हुआ. उससे पहले सांवले रंग को खूबसूरती का पै’माना माना जाता था.

फेयर एंड लवली
1975 में, हिंदुस्ता’न यूनिलीवर ने “फेयर एंड लवली” नाम की एक गोरा करने वाली क्रीम लॉ’न्च की. देश में गोरेपन की क्रीम के बाजार का 50-70 फीसदी हि’स्सा “फेयर एंड लवली” के पास ही है. “फेयर एंड लवली” ने पिछले साल 2000 करोड़ क्लब में प्रवेश किया, जिससे पता चलता है कि भारत में गो’रा करने वाली क्री’म खूब बिकती हैं.

गोरापन है क्या ?
हमारी त्वचा का रं’ग जेने’टिकली तय होता है. ये इससे तय होता है कि हमारी त्वचा के सबसे ऊपरी हि’स्से में मेलानो’सोम्स कितने बड़े, कितनी जगह घेरे हुए और किस त’रह बंटे हैं. मेला’नोसोम्स असल में एक कि’स्म की बारी’क थैली होती है जिसमें मेलानिन या पिगमेंट भरे होते हैं, यही त्व’चा के रंग पर असर डालते हैं.