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शीशे के सामने जाइए और अपना माथा देखिए, कैसा होगा भविष्य और भाग्य, चुटकियों में चल जाएगा मालूम……..

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व्यक्ति का सिर्फ व्यक्तित्व ही नहीं बल्कि उसका माथा या ललाट भी उसके भाग्य का सूचक होता है. शरीर विज्ञान की दृष्टि से भी माथा, मानव के मस्तिष्क के सबसे करीब होता है. मस्तिष्क पर जो भी प्रभाव पड़ता है, वह तत्काल माथे पर परिलक्षित होता है. योग साधना में भी आज्ञा चक्र अर्थात “तीसरा नेत्र” माथे पर दोनों भौंहों के मध्य भृकुटि स्थान पर माना गया है. ज्योतिष में सामुद्रिक शास्त्र में यह बताया गया है कि माथा व्यक्ति के व्यक्तित्व ही नहीं बल्कि भाग्य का एकमात्र सूचक होता है. हमारे यहां मान्यता है कि शिशु के पैदा होने के छठवीं रात्रि में वैमाता उसके माथे पर उसका भाग्य लिखती हैं. इसी को ‘भाग्य का लेखा’ कहा जाता है.

जो विधिना ने लिख दियो, छठी रात्रि को अंक
राई घटै न तिल बढ़ै, रह रे जीव निशंक”

आइए जानते हैं एक व्यक्ति के माथे के प्रकार और उनके प्रभाव-

चौड़ा माथा- भाग्यशाली, गुणी और आत्मविश्वास से भरपूर होने का सूचक है. आमतौर पर ऐसे लोग खुले विचारों वाले उदार प्रवृत्ति के होते हैं. जीवन में सकारात्मक रुख रहता है. यद्धपि थोड़े दंभी और अहंकारी भी होते हैं.

संकरा माथा- आत्मविश्वास की कमी तथा अंतर्मुखी स्वभाव का सूचक है. जीवन में काफी संघर्ष और परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

आयताकार माथा– असंतुलित व्यक्तित्व का सूचक है. हालांकि ऐसे लोग दिल के बुरे नही होते.

अंडाकार माथा- अंडाकार माथे वाले व्यक्ति प्रायः अंतर्मुखी स्वभाव के होते हैं. उनमें प्रखर कल्पनाशक्ति होती है, अपने जीवन में उसका उपयोग करके सफल होते हैं.

नतोदर यानी बीच में दबा माथा– दुनियादारी के मामलों में बहुत ही व्यवहारिक सोच होती है. सामने वाले व्यक्ति से अपना काम निकलवाने में माहिर होते हैं. अपनी शेखी बघारने की प्रवृत्ति होती है.

क्या कहती हैं माथे की रेखाएं-

माथे पर बनने वाली रेखाएं भी मनुष्य के भाग्य का सूचक होती हैं. सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार सीधी, गहरी और स्पष्ट रेखाएं बताती हैं कि प्रतिभा और कार्य क्षमताओं से भरपूर ऐसा व्यक्ति अपने पसंदीदा क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है. टूटी और उथली रेखाएं प्रतीक होती हैं कि व्यक्ति अपने संशय और किंकर्तव्यविमूढ़ता के चलते कोई निर्णय नहीं ले पाता और न ही किसी क्षेत्र में फोकस कर पाता है. अतः सफलता मिलने में दुश्वारियां आती हैं. माथे पर यदि खड़ी रेखाएं हो तो व्यक्ति असाधारण प्रतिभा सम्पन्न दैवीय शक्तियों वाला होता है. यदि त्रिशूल बनाती हुई तीन रेखाएं हों तो व्यक्ति परालौकिक शक्ति से सम्पन्न किसी महान आत्मा का पुनर्जन्म होता है.

लेखक के बारे में: ज्योतिर्विद राजेश शुक्ला पिछले 22 वर्षों से ज्योतिष की विभिन्न विधाओं के माध्यम से लोगों को उनकी समस्याओं के निवारण एवं उज्ज्वल भविष्य हेतु उपयोगी परामर्श द्वारा मार्गदर्शन कर रहे हैं. अंग्रेजी साहित्य में उच्च शिक्षा प्राप्त करके शुरुआती दौर में पत्रकारिता के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे. ज्योतिष के परंपरागत ज्ञान को समसामयिक स्थितियों में व्यवहारिक रूप से उपयोगी बनाने में निरंतर प्रयासरत हैं. टेलीविजन शो किए हैं और लेखन कार्य से जुड़े रहे हैं.