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आपकी सफलता के पीछे होते हैं चार दुश्मन जानिए उन्हें कैसे दें मात..

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गरुड़ पुराण को सनातन धर्म में महापुराण माना गया है. ये पुराण व्यक्ति को भगवान विष्णु की भक्ति का मार्ग दिखलाता है. इसमें गरुड़ और श्रीहरि के बीच हुई बातचीत के जरिए व्यक्ति को पाप, पुण्य, सदाचार, भक्ति और वैराग्य आदि के बारे में बताया गया है. गरुड़ पुराण में ऐसी कई नीतियां हैं जो मानव जाति के लिए कल्याणकारी हैं और व्यक्ति को धर्म के मार्ग पर चलने के लिए अग्रसर करती हैं.

इसमें जीवन और मृत्यु के अलावा लोक और परलोक के जरिए भी व्यक्ति को अच्छे कर्म करने की प्रेरणा दी गई है. साथ ही ऐसे कर्मों से बचने के लिए कहा गया है जो मनुष्य को गर्त की ओर धकेलते हैं. गरुड़ पुराण में चार ऐसे अवगुणों के बारे में बताया गया है जो व्यक्ति को कभी सफल नहीं होने देते, उन अवगुणों को त्याग देने में ही भलाई है.

1- चिंता
जो लोग हर समय अपने भविष्य की चिंता में लगे रहते हैं, वो लोग कभी भी सफल नहीं हो सकते क्योंकि ऐसे लोग अपने वर्तमान समय को नष्ट कर रहे होते हैं. वास्तव में अगर आपको सफल होना है तो वर्तमान को भविष्य का आधार बनाना चाहिए और समस्या के समाधान पर काम करना चाहिए. इसलिए चिंता नहीं चिंतन करें.

2- आलस्य
आलस्य को व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु कहा गया है. व्यक्ति चाहे कितना ही प्रतिभावान हो, अगर वो आलसी है तो कभी अपनी प्रतिभा का सही प्रयोग नहीं कर सकता. ऐसा व्यक्ति चाहकर भी अपना मुकाम हासिल नहीं कर सकता.

3- क्रोध

क्रोध व्यक्ति के बने बनाए काम भी बिगाड़ कर रख देता है. क्रोध व्यक्ति की बुद्धि को हर लेता है. क्रोध के दौरान व्यक्ति कभी भी कोई सही निर्णय नहीं लेता. ऐसे में वो किसी दूसरे का नुकसान नहीं बल्कि स्वयं का नुकसान ही करता है. इसलिए जीवन में अगर कामयाब होना है तो क्रोध को त्याग दीजिए.

4- संशय
यदि कोई काम करना है तो उसे पूरे विश्वास के साथ करना पड़ेगा, तभी सफलता मिल सकती है. यदि आपके मन में किसी भी तरह का संशय रहेगा तो कभी कुछ नहीं हो सकता. संशय आपके आत्मविश्वास को कम करता है. यदि आत्मविश्वास ही कमजोर होगा तो भला सफलता कैसे मिल सकती है. इसलिए जब भी किसी काम की शुरुआत करें, पूरे विश्वास से करें. यदि कहीं असफल होते भी हैं तो स्थिति का विश्लेषण करके फिर से प्रयास करें. सफलता जरूर मिलेगी.