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राजा और ब्राह्मण से कम नहीं होती ऐसी स्त्री की ताकत, जानिए क्या कहती है चाणक्य नीति…….

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आचार्य चाणक्य ने हर परिस्थिति को बहुत करीब से परखा और जीवनभर वे अपने अनुभवों से लोगों का भला करते रहे. आचार्य के बताए मार्ग पर चलकर आज भी व्यक्ति तमाम मुश्किलों को आसानी से हल कर सकता है.

आचार्य चाणक्य सिर्फ एक कूटनीतिज्ञ, राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री ही नहीं थे, बल्कि उन्हें सामाजिक विषयों की भी काफी जानकारी थी. आचार्य ने अपना जीवन काफी कठिनाइयों में बिताया था. इस दौरान उन्होंने हर परिस्थिति को बहुत करीब से परखा और जीवनभर वे अपने अनुभवों से लोगों का भला करते रहे. आचार्य के बताए मार्ग पर चलकर आज भी व्यक्ति तमाम मुश्किलों को आसानी से हल कर सकता है.

आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति ग्रंथ में राजा, विद्वान और ब्राह्मण की ताकत के साथ-साथ एक स्त्री की ताकत का भी बखान किया है. चाणक्य नीति के सातवें अध्याय के ग्यारहवें श्लोक में उन्होंने कहा है कि स्त्रियां अपनी ताकत का सही प्रयोग करके जो चाहें, वो कर सकती हैं और किसी से कुछ भी करवा सकती हैं. जानिए क्या कहती है चाणक्य नीति.

बाहुवीर्य बलं राज्ञो ब्रह्मवित् बली
रूप-यौवन-माधुर्य स्त्रीणां बलमनुत्तमम्

इस श्लोक के माध्यम से आचार्य चाणक्य कहते हैं कि एक राजा की शक्ति उसकी भुजाओं में है. एक ब्राह्मण की शक्ति उसके ज्ञान में है और एक स्त्री की शक्ति उसकी सुंदरता और मधुर वचनों में है.

इस श्लोक के जरिए आचार्य का कहने का अर्थ है कि राजा का काम होता है प्रजा की रक्षा करना. ऐसे में एक राजा का बाहुबली होना बहुत जरूरी है. जब कोई राजा बाहुबली होता है, तो उसके साथ अन्य ताकतें अपने आप जुड़ती जाती हैं और उसकी ताकत बढ़ती जाती है. ऐसा राजा अपनी जनता और दुश्मन दोनों को संभालना जानता है.

वहीं एक ब्राह्मण की पहचान उसके ज्ञान से होती है. यही ज्ञान उसकी असली ताकत होती है. जिस ब्राह्मण के पास ज्ञान होता है, वो न सिर्फ समाज में बहुत मान और सम्मान पाता है, बल्कि अपनी बुद्धि कौशल से किसी को भी सबक सिखा सकता है.

इसके अलावा आचार्य का मानना था कि एक स्त्री का बल राजा और ब्राह्मण से कम नहीं होता. स्त्री की खूबसूरती और मधुर वचन उसकी ताकत होते हैं. इनके बूते पर स्त्री कुछ भी कर सकती है और कुछ भी लोगों से करवा सकती है.