Categories
धर्म

ऐसे लोग होते हैं आपके जीवन के सच्चे साथी, जिंदगी के किसी भी पड़ाव में नहीं छोड़ते हैं साथ………

धार्मिक खबर

आचार्य चाणक्य की नीतियां हमेशा से ही प्रासंगिक रही हैं. उनके विचार एक व्यक्ति के जीवन के लिए बहुत ही अनमोल हैं. चाणक्य नीति शास्त्र के बहुत अच्छे जानकार थे.

आचार्य चाणक्य की नीतियां हमेशा से ही प्रासंगिक रही हैं. उनके विचार एक व्यक्ति के जीवन के लिए बहुत ही अनमोल हैं. चाणक्य नीति शास्त्र के बहुत अच्छे जानकार थे. उन्होंने अपनी नीतियों के माध्यम से ही चंद्रगुप्त मौर्य को राजा की गद्दी तक पहुंचा दिया था. आचार्य चाणक्य ने ही अर्थशास्त्र की भी रचना की थी. इसीलिए उन्हें कौटिल्य भी कहा जाता है.

भले ही उनकी नीतियां कठोर लगती हों लेकिन इन नीतियों में ही जीवन का सार छुपा हुआ है. अगर सफल जीवन पाना चाहते हैं तो आचार्य चाणक्य की नीतियों को अपने जीवन में अपनाना ही चाहिए. हालांकि, आज के भाग-दौड़ वाले जीवन में हम उनकी नीतियों से अछूते होते जा रहे हैं या फिर हम उनकी नीतियों पर चलना ही नहीं चाहते तो ऐसे में एक सफल जीवन की कल्पना भी हमें नहीं करनी चाहिए.

आचार्य चाणक्य ने भी अपने जीवन में कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना किया है. उन्होंने ऐसी-ऐसी बातें जीवन से जुड़ी हुई बताई हैं कि वो हर कदम पर मनुष्य का साथ ही देंगी. आज हम उन्हीं की बताई गई कुछ बातों के बारे में जानेंगे-

सच्चा साथी है ज्ञान, सदा रहता है साथ

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि, जो भी व्यक्ति अपने घर से दूर यानी परदेस में रहता है, उसका सबसे सच्चा साथी ज्ञान ही होता है. अगर व्यक्ति के पास ज्ञान होगा तो वो विषम परिस्थितियों से भी बाहर निकल आएगा. ये उनका अंतिम समय तक साथ निभाता है. इसलिए जहां भी ज्ञान मिले उसे अर्जित करना ही श्रेष्ठ होता है.

रोग के समय औषधि सच्ची साथी

चाणक्य कहते हैं कि, किसी भी रोगी मनुष्य की सच्ची मित्र औषधि ही होती है. अगर दवाई एक रोगी के पास है तो उससे वो बड़े से बड़े रोग से भी बाहर निकल सकता है. इसलिए मनुष्य को कभी भी दवाई लेने से न तो परहेज करना चाहिए और न ही लापरवाही.

धर्म रहता है सदैव साथ

आचार्य चाणक्य के अनुसार, एक मनुष्य का सच्चा साथी धर्म होता है. धर्म व्यक्ति को सही और गलत का निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है. धर्म पर चलकर ही मनुष्य सदैव सत्कर्मों की ओर प्रेरित होता है. धर्म अंत समय तक मनुष्य के साथ रहता है. धर्म पर चलने वाले व्यक्ति जीवन भर और मृत्यु के पश्चात भी सम्मान प्राप्त करते हैं.

आचार्य चाणक्य की नीतियों पर चलना हमेशा ही श्रेयष्कर रहता है. अपने जीवन को आनंदमय और अर्थपूर्ण बनाने के लिए उनकी नीतियों का अनुसरण अवश्य करना चाहिए.