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मछली पकड़ते वक्त मछुआरे के हाथ लगा जैकपॉट, मिला ऐसा दुर्लभ कीमती जीव, पर किस्मत बदलने से पहले ही फेंक दिया….

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: समंदर में अनमोल खजाने छिपे हैं और कुछ नसीबवाले ऐसे होते हैं, जिनके हाथ ऐसे खजाने या बहुमूल्य चीज लग भी जाती है। ब्रिटेन में एक मछुआरा जब मछली पकड़ रहा था तो उसके हाथ एक जैकपॉट लग गया। मछुआरे के हाथ एक ऐसा ब्लू झींगा मछली लगा है, जिसकी कल्पना उसने शायद ही जिंदगी में कभी की होगी। 25 साल का मछुआरा हमेशा की तरफ समंदर तट पर मछली पकड़ रहा था लेकिन जब इस बार उसने जब जाल खींचा तो उसके हाथ में एक अनमोल झींगा मछली लगा है।


दुर्लभ है झींगा मछली

ब्रिटेन के कॉर्नवाल शहर का रहने वाला मछुआरा टॉम लेमबर्न पेंजेंन्स समुन्द्र तट पर मछली पकड़ने हर दिन जाया करता था और उसी से उसकी रोजी-रोटी चलती थी। लेकिन इस बार मछुआरे टॉम लेमबर्न के हाथ में एक दुर्लभ झींगा मछली लगी है। ये झींगा मछली किस्मत से ही किस्मत वालों के हाथ लगती है और इस बार किस्मतवाला बना है लंदन का मछुआरा टॉम लेमबर्न। इस बार जब मछली पकड़ने के बाद टॉम लेमबर्न ने जाल खींचा तो उसने देखा कि जाल में दुर्लभ झींगा मछली फंसी हुई है। इस दुर्लभ नीले रंग की झींगा मछली को देखकर उसकी आंखे फटी की फटी रह गई।

मछली को वापस छोड़ा
मछली को वापस छोड़ा
टॉम लेमबर्न ने जब जाल में ब्लू लॉबस्टर को फंसा हुआ देखा तो वो हैरान रह गया। लेकिन पता नहीं उस वक्त उसके मन में क्या आया, कुछ तस्वीरें लेने के बाद उसने ब्लू लॉबस्टर यानि नीले रंग के झींगा मछली को वापस समंदर में छोड़ दिया। समंदर विज्ञान जानने वालों के मुताबिक नीले रंग की ये ब्लू लॉबस्टर मछली काफी ज्यादा दुर्लभ मानी जाती है और करीब 20 लाख में एक मछली ऐसी पाई जाती है। मछुआरे टॉम लेमबर्न के मुताबिक जब उसने मछली को देखा तो उसे लगा कि इस मछली को लोगों के बीच नहीं आना चाहिए। ये पानी के अंदर ही सुरक्षित रहेगी। यही सोचकर उसने इस दुर्लभ मछली की कुछ तस्वीरें लेने के बाद उसे वापस पानी में छोड़ दिया। टॉम लेमबर्न ने इस दुर्लभ मछली को छोड़ने के बाद कहा कि ‘पानी के अंदर से निकलने वाला हर बर्तन में क्या हो सकता है, इसका आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं। मैने इस दुर्लभ नीले रंग की झींगा मछली को इससे पहले कभी नहीं देखा था। अभी मछली पकड़ने का सीजन शुरू ही हुआ है ऐसे में ये दुर्लभ मछली मेरे हाथ लगी है, इसीलिए मैं अपने आप को काफी भाग्यशाली मान रहा हूं।’ मछुआरे टॉम लेमबर्न ने आगे बताया कि ‘मछली को पकड़ने के बाद मैंने इसकी साइज को नापा। ये काफी छोटी मछली थी और इतनी छोटी मछली को पकड़ने का ख्याल भी हमारे मन में नहीं आता है। चूंकी ये मछली बिल्कुल दुर्लभ है, इसीलिए मैंने कुछ फोटोज लेकर इसे वापस पानी में छोड़ दिया। अगर ये दुर्लभ मछली बड़ी रहती तो इसे लेकर मैं नेशनल हैचरी चला जाता’।

काफी छोटी थी दुर्लभ झींगा मछली
काफी छोटी थी दुर्लभ झींगा मछली
मछुआरे ने आगे कहा कहा कि ‘कुछ फोटो लेने के बाद मैंने नेशनल हैचरी में भेज दिया, जिसके बाद मुझे बताया गया कि ये दुर्लभ ब्लू लॉबस्टर मछली है, जो दो लाख में एक पाई पाती है।’ इस दुर्लभ नीले रंग की झींगा मछली को देखकर नेशनल हैचरी के सदस्य भी आश्चर्यचकित हो गये। उन्होंने कहा कि यह एक बहुत ही दुर्लभ रंग रूप वाली मछली है। जो लगभग 20 लाख मछलियों में एक पाई जाती है। इसलिए जब टॉम ने हमें इसकी फोटो भेजी तो हम चकित रह गए। झींगा मछली को जमीन पर लाने के लिए बहुत छोटा था, इसीलिए इसे समुद्र में वापस दे दिया गया। कौन जानता था कि एक क्रस्टेशियन इतना जीवंत हो सकता है? नेशनल लॉबस्टर हैचरी के पर्यवेक्षक बेन मार्शल ने कहा कि ‘नीले लॉबस्टर को देखना बहुत, बहुत दुर्लभ और बहुत दिलचस्प है। मछुआरे ने इसे वापस पानी में फेंक दिया क्योंकि इसकी लंबाई काफी कम थी’। उन्होंने कहा कि ‘ब्लू लॉबस्टर्स एक आनुवंशिक दोष के कारण अपना असामान्य रंग बदल लेती है। इस तरह की मछली के अंदर काफी ज्यादा मात्रा में प्रोटीन बनना शुरू हो जाता है, जिसकी वजह से इस मछली के अंदर प्रोटीन का एक नया स्तर बन जाता है, जो एस्टैक्सैथिन नाम के एक अणु के साथ मिलकर बनता है, जो इस मछली को इतना अलग और ब्लू रंग देता है और इसे दुर्लभ मछली बनाता है।