139 साल पहले भी अयोध्या में हुई थी हिंसा बाबरी मस्जिद गिराए जाने पर .. पड़े पूरी खबर

बाबरी मस्जिद बिध्वंश की पूरी गाथा

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अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत बीजेपी के 13 नेताओं पर आपराधिक साजिश का केस चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की पिटीशन पर यह फैसला सुनाया। 6 दिसंबर, 1992 को मस्जिद ढहाए जाने से 139 साल पहले भी अयोध्या में हिंसा भड़की थी। निर्मोही अखाड़े ने दावा किया था कि बाबर के समय एक मंदिर को गिराकर मस्जिद बनाई गई थी। ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेशन ने फेंसिंग हटाकर पूजास्थल को अलग कर दिया…1853 में नवाब वाजिद अली शाह के समय पहली बार मंदिर को  लेकर हिंसा भड़की थी। बताया जाता है कि तब निर्मोही अखाड़े ने दावा किया था कि बाबर के समय एक मंदिर को गिराकर मस्जिद बनाई गई थी। 1859 में ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेशन ने फेंसिंग हटाकर पूजास्थल को अलग कर दिया। मुस्लिमों को अंदरूनी तो हिंदुओं को बाहरी हिस्से का इस्तेमाल करने की इजाजत दी गई। 1885 में महंत रघुबीर दास ने पहला केस दायर किया। इसमें मस्जिद के बाहर राम चबूतरे पर एक छतरी लगाने की परमिशन मांगी गई। फिरोजाबाद डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने पिटीशन नामंजूर कर दी।
68 साल पहले रामलला की प्रतिमा मस्जिद में लाई गई– 1949 में रामलला की प्रतिमा मस्जिद के अंदर लाई गईं। एक हिंदू ग्रुप पर प्रतिमा को अंदर लाने का आरोप लगा। हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्षों की तरफ से केस किया गया। सरकार ने पूरे इलाके को विवादित घोषित कर परिसर के गेट पर ताला लगा दिया।1950 में गोपाल सिंह विषारद और महंत परमहंस रामचंद्र दास ने फिरोजाबाद कोर्ट से जन्मस्थान में पूजा की परमिशन मांगी। चूंकि अंदरूनी हिस्से में ताला था, इसलिए परमिशन दे दी गई।1959 में निर्मोही अखाड़े ने तीसरा केस दायर किया। इसमें विवादित हिस्से पर हक की मांग की गई। साथ ही रामजन्मभूमि के संरक्षक होने का दावा किया।1961 में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने मस्जिद के अंदर प्रतिमा रखने पर केस दायर किया। साथ ही मस्जिद होने का दावा किया और उसके चारों ओर की जमीन को कब्रिस्तान बताया।

पढ़े पूरा इतिहास बाबरी मस्जिद के साथ क्या हुआ…

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