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इस मंदिर में चोरी करने से होने लगते हैं बड़े बड़े चमत्कार..

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51 शक्तिपीठों में से एक चूड़ामणि देवी मंदिर में चोरी करने से होती है पुत्र की प्राप्ति
3 वर्ष पहले

धर्म डेस्क. हर धर्म में चोरी करने को गलत माना गया है इसे पाप माना जाता है। लेकिन उत्तराखंड में कई मंदिर ऐसे भी हैं जो अपनी अनूठी मान्यताओं के लिए जाने जाते हैं । इन्हीं में से एक है सिद्धपीठ चूड़ामणि देवी का मंदिर। यहां अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए चोरी करनी पड़ती है। उत्तराखंड के चुड़ियाला गांव में स्थित यह मंदिर पुत्र प्राप्ती की मनोकामना पूरी करने के लिए जाना जाता है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में शामिल है।
लोकड़ा चुराने की है परंपरा

  • मान्यताओं के अनुसार जो लोगों को पुत्र की चाह होती है वो जोड़े यहां आकर माता के चरणों से लोकड़ा (लकड़ी का गुड्डा) चोरी करके अपने साथ ले जाएं। तो बेटा होता है।
  • उसके बाद बेटे के साथ माता-पिता को यहां माथा टेकने आना होता है। इस अवसर पर मंदिर पर भंडारा कराने की भी मान्यता है।
  • उसके साथ ही दंपती यहां से ले गए लोकड़े के साथ ही एक अन्य लोकड़ा भी अपने पुत्र के हाथों देवी के चरणों में चढ़वाते हैं।
    ऐसे हुआ था मंदिर का निर्माण
  • यहां प्रचलित कथाओं से अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 1805 में लंढौरा रियासत के राजा ने करवाया था। एक बार राजा शिकार करने जंगल में आए हुए थे।
  • तभी उन्हें माता की पिंडी के दर्शन हुए। राजा का कोई पुत्र नहीं था। इसलिए राजा ने माता से पुत्र प्राप्ति की मन्नत मांगी। इसके बाद राजा को पुत्र हुआ और इच्छा पूरी होने पर उन्होंने इस मंदिर का निर्माण करवाया।
    51 शक्तिपीठों में से एक
  • कई कथाओं और ग्रंथों के अनुसार, चूड़ामणि देवी मंदिर देवी सती के 51 शक्तिपीठों में से एक है।
  • यहां पर देवी का चूड़ा गिरा था। इसी वजह से यह मंदिर चूड़ामणि देवी के नाम से प्रसिद्ध है
    ऐसे पहुंचे
  • यह मंदिर रुड़की से 19 किलोमीटर दूर भगवानपुर के चुडिय़ाला गांव में स्थित है। यहां पहुंचने के लिए रुड़की रोडवेज बस अड्डे से बस में भगवानपुर आना पड़ेगा।
  • इसके अलावा ट्रेन से भी यहां पर पहुंचा जा सकता है। हालांकि चुडिय़ाला स्टेशन पर केवल पैसेंजर ट्रेनों का ही ठहराव है। उनकी संख्या भी कम ही है।