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क्यों नहीं करना चाहिए जूठा भोजन, आती है दरिद्रता और…

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हमें बचपन से ही ये सिखाया जाता है कि कभी किसी का जूठा भोजन नहीं करना चाहिए, लेकिन वर्तमान में इस बात का पालन शायद ही कोई करता हो। इस परंपरा के पीछे न सिर्फ धार्मिक बल्कि वैज्ञानिक पक्ष भी है। जानिए इस परंपरा से जुड़ी खास बातें…

भोजन के बारे में क्या कहते हैं शास्त्र

  • भोजन में शुद्धता और सात्विकता होना आवश्यक है। शास्त्र कहते हैं भोजन में कोई भी दूषित पदार्थ, मांसाहार ना हो। भोजन बनाते समय से लेकर उसे परोसने तक भी जूठा हाथ नहीं लगना चाहिए।
  • एक-दूसरे का जूठा भोजन करना सर्वदा वर्जित है। यहां तक कि पति-पत्नी को भी एक-दूसरे का जूठा भोजन नहीं खाना चाहिए। शास्त्रों का मत है कि जो व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति का जूठा भोजन करता है, वह उस व्यक्ति के सारे ग्रह दोष, उसकी पीड़ाओं और उसके दुर्भाग्य में सहभागी बन जाता है।
  • जूठा भोजन करने से संक्रामक रोग फैलने की आशंका रहती है, क्योंकि सभी लोगों के भोजन करने का तरीका अलग-अलग होता है। कोई व्यक्ति बिना हाथ-पैर धोए ही भोजन करने बैठ जाता है, जिससे रोग फैलते हैं।
  • वैदिक ज्योतिष के अनुसार किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली का दूसरा भाव धन के साथ वाणी का भी कारक घर होता है। किसी दूसरे का जूठा भोजन खाने से हमारी वाणी प्रभावित होती है। वाणी में कर्कशता आती है।
  • जिसका जूठा भोजन खाते हैं उसके अशुद्ध विचार हमारे मस्तिष्क में समा जाते हैं। किसी का जूठा भोजन खाने से ग्रहों की पीड़ा प्रारंभ हो जाती है। इससे हमारे सुखों में कमी आती है।
  • जूठा भोजन करने से कुंडली का भाग्य स्थान यानी नवम स्थान प्रभावित होता है, जिससे आपका भाग्य दुर्भाग्य में बदल सकता है।