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राहु, सूर्य और चंद्र से शनि की युति करती है परेशान, जानिए बचाव के उपाय

ज्योतिषशास्त्र में शनि को न्याय का देवता बताया गया है। जो लोग अच्छे काम करते है, शनिदेव उनका अच्छा करते हैं और जो बुरा करते हैं, उन्हें सजा भी देते हैं। कुंडली में शनि देव का सही स्थान पर होना जरूरी है। अन्य ग्रहों की तरह शनि देव भी समय-समय पर स्थान बदलते रहते हैं और ज्योतिषशास्त्र कहता है कि तीन ग्रहों के साथ शनि की युति अशुभ मानी जाती है। ये तीन ग्रह हैं – राहु, चंद्रमा और सूर्य। शनि और इन तीन ग्रहों के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। जिन लोगों की कुंडली में शनि और राहु एक ही स्थान पर होते हैं, उनके लिए वह समय बहुत बुरा होता है। बीमारियों के साथ ही आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी तरह शनि के साथ चंद्रमा की युति विषयोग बनाती है। जिन लोगों की कुंडली में ऐसा होता है, वे मानसिक तनाव का शिकार होते हैं। सूर्य तथा शनि का योग भी शुभ नहीं माना जाता है। जिस जातक की कुंडली में यह योग बनता है उसे मेहनत का फल नहीं मिलता।

इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करें। शनि देव को शमी का वृक्ष भी प्रिय है। इसकी पूजा भी शुभ मानी गई है। वहीं हनुमानजी को शनि देव का परममित्र कहा जाता है। किसी भी तरह के शनि दोष से मुक्ति के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें। इस दिन गाय की पूजा करना और उसे चारा खिलाने से भी शनि संबंंधी दोष दूर होते हैं।