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चाणक्य नीति

चाणक्य वचन :: सम्पूर्ण विश्व में इन चार चीजों से बढ़कर कुछ भी नहीं है…

धार्मिक ख़बर

चाणक्य वचन – संपूर्ण सृष्टि में इन 4 चीजों से बढ़कर और कुछ नहीं है…

दार्शनिक और समाजशास्त्री
दार्शनिक और समाजशास्त्री
अपने समय के महान दार्शनिक और समाजशास्त्री माने जाने वाले चणक्य जीवन के हर क्षेत्र पर अपनी गहरी पकड़ रखते थे… वे जानते थे कि अंत में सफल वही व्यक्ति होता है जो भावनाओं के सहारे ना रहकर व्यवहारिक तरीके से अपने जीवन को व्यतीत करता है। चाणक्य ने अपनी नीतियों, अपने अनुभव को चाणक्य नीति के अंतर्गत संकलित किया है…जिसका औचित्य आजे के दौर में भी बरकार है। चाणक्य के नीतिशास्त्र के अंतर्गत बहुत से श्लोकों का उल्लेख मिलता है…. इन्हीं में से एक है वह बहुमूल्य रत्न जो पहचान करवाता है उन चार चीजों की, जिनसे बढ़कर इस सृष्टि में और कुछ नहीं हो सकता। आचार्य चाणक्य ने स्वयं इन चीजों कोमानव जीवन में सर्वश्रेष्ठ माना है।

श्लोक
श्लोक

नात्रोदक समं दानं न तिथि द्वादशी समा। न गायत्र्या: परो मंत्रो न मातुदेवतं परम्।।

अन्नदान
अन्नदान
आचार्य चाणक्य के इस श्लोक के अनुसार अन्न के दान से बड़ा कोई और दान इस ब्रह्मांड में नहीं है। किसी भूखे व्यक्ति को खाना खिलाना, प्यासे को पानी पिलाना…ये पुण्य फल प्रदान करता है। जो व्यक्ति ऐसा करता है उसपर सदैव ईश्वर की कृपा बनी रहती है। गृहस्थ व्यक्ति को समय-समय पर अन्न का दान करना चाहिए… इससे ईश्वर उससे प्रसन्न रहते हैं।

द्वादशी तिथि
द्वादशी तिथि
द्वादशी यानि जिस दिन एकादशी तिथि के व्रत का पारण किया जाता है। महान आचार्य के अनुसार द्वादशी तिथि के समान पावन कोई अन्य तिथि नहीं है… जो लोग एकादशी तिथि का व्रत रखते हैं वे अलगे दिन यानि द्वादशी पर व्रत का पारण करते हैं। इन लोगों पर हमेशा भगवान विष्णु की कृपा रहती है.. ऐसे लोगों को बैकुंठ धाम की प्राप्ति अवश्य होती है।

गायत्री मंत्र
गायत्री मंत्र

आचार्य चाणक्य के अनुसार संपूर्ण सृष्टि में, समस्त ब्रह्मांड में गायत्री मंत्र से श्रेष्ठ कुछ नहीं है…. इस मंत्र के समान कोई और नहीं है। हिन्दू धर्म के अंतर्गत देवी गायत्री को चारों वेदोंकी जननी माना जाता है… ऐसी मान्यता है ऋग्वेद, यजुर्वेद अथर्वेद और सामवेद की उत्पत्ति मां गायत्री से ही हुई है।

जन्म देने वाली माता
जन्म देने वाली माता
आचार्य चाणक्य के अनुसार जो स्त्री आपको जन्म देती है… जिसे हम माता कहते हैं वह दुनिया सबसे ज्यादा बहुमूल्य है। मां के समान कोई दूसरा नहीं हो सकता… माता की सेवा को ही स्वर्ग का मार्ग मानना चाहिए। ओ व्यक्ति अपनी मां का सम्मान नहीं करता उसे ना तो इस लोक में शांति मिलती है और ना उस लोक में।