Categories
धर्म

महाशिवरात्रि पर इस बार “रुद्रयोग”भूलकर भी ना चढ़ाएं…..

धार्मिक खबर

नई दिल्ली। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस बार चतुर्दशी तिथि में रात्रि का समय 11 मार्च ही रहेगा और शिवरात्रि में रात के समय चतुर्दशी तिथि का अधिक महत्व है। इस द‍िन व‍िध‍ि-व‍िधान से श‍िवजी की पूजा करने से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। ज्योतिषविदों के अनुसार महादेव की पूजा-अर्चना करना बेहद आसान है। जिससे करने से जीवन में सुख-शांति मिलती है और लोगों की किस्मत जाग जाती है। इस बार महाशिवरात्रि के दिन श्रवण नक्षत्र का साक्षी सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत योग एवं त्रयोदशी प्रदोष का योग बना है। मान्यता है कि शिवभक्तों के लिए बेहद फलदायी होगा। यह संयोग अत्यंत दुर्लभ है।

शिव पूजा का समय
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन शुभ काल के दौरान ही भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जानी चाहिए तभी पूजा का सम्पूर्ण फल मिलता है। महाशिवरात्रि के दिन रात्रि में चार बार शिव पूजन की परंपरा है और ऐसा माना जाता है कि इस दिन इन चारों पहर पूजन करने से सभी पापों और कष्टों का निवारण होने के साथ घर में सुख समृद्धि भी आती है।

महाशिवरात्रि पर रात का क्यों है महत्व
हिंदू धर्म में रात्रि कालीन विवाह मुहूर्त को उत्तम माना गया है इसी कारण भगवान शिव का विवाह भी देवी पार्वती से रात्रि के समय ही हुआ था। इसलिए उत्तर भारती पंचांग के अनुसार जिस दिन फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि मध्य रात्रि यानी निशीथ काल में होती है उसी दिन को महाशिवरात्रि का दिन माना जाता है।

महाशिवरात्रि को लग रहे हैं दुर्लभ योग
इस बार महाशिवरात्रि के दिन श्रवण नक्षत्र का साक्षी सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत योग एवं त्रयोदशी प्रदोष का योग बना है। 11 मार्च सुबह 9 बजकर 24 मिनट तक शिव योग रहेगा। उसके बाद सिद्ध योग लग जायेगा। जोकि 12 मार्च सुबह 8 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। शिव योग में किए गए सभी मंत्र शुभफलदायक होते हैं। इसके साथ ही रात 9 बजकर 45 मिनट तक धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा। सिद्ध योग को मंत्र साधना, जप, ध्यान के लिए शुभ फलदायी माना जाता है। इस योग में किसी नई चीज को सीखने या काम को आरंभ करने के लिए श्रेष्ठ कहा गया है। ऐसे में सिद्ध योग में मध्य रात्रि में शिवजी के मंत्रों का जप उत्तम फलदायी होगा।

महाशिवरात्रि के दिन पड़ रहा है पंचक
इस बार महाशिवरात्रि के दिन पंचक भी लग रहे हैं। पंचक 11 मार्च सुबह 9 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर 15 मार्च को पूरा दिन पार कर भोर 4 बजकर 44 मिनट तक पंचक रहेंगे। महाशिवरात्रि इस बार गुरुवार को पड़ रही हैं हैं। पंचक के दौरान लकड़ी इकठ्ठी करना, चारपाई खरीदना या बनवाना, घर की छत बनवाना तथा दक्षिण दिशा की यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता है। इन कामों को छोड़कर आप कोई भी काम कर सकते हैं। वह शुभ माना जाता है।