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धार्मिक

कितने भी करलो ये पांच दुष्कर्म कभी नहीं लगेगा पाप बल्कि आपका दुश्मन होगा आपके पाप का….

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सुरक्षित गोस्वामी
सवाल: गीता में कहा है: कर्मों और कर्म फलों को मुझे अर्पण कर दो! तो क्या भगवान हमारे कर्म फलों की आजादी पर अंकुश लगा रहे हैं?
जवाब: ईश्वर द्वारा सभी प्राणियों को कर्म करने की स्वतंत्रता मिली है। कोई भी प्राणी कभी भी इच्छानुसार कैसा भी कर्म कर सकता है। इन कर्मों की आजादी के कारण ही जीवन में नयापन बना रहता है। यदि कर्म करने की आजादी न हो तो जीवन में जीवन जैसा कुछ भी नहीं रहेगा। इसी आजादी के कारण व्यक्ति पाप, पुण्य या मुक्ति में गति कर सकता है। कर्मों की इस आजादी के कारण सबको अपना-अपना फल मिलता रहता है और व्यक्ति उसको भोगता रहता है। इसी कारण जगत में इतनी विविधता दिखाई पड़ती है। इसलिए भगवान गीता में कहते हैं सभी प्राणी कर्म करने में स्वतंत्र है।

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वैसे व्यक्ति कई प्रकार के कर्म करता है, जिनमें अधिकतर कर्म बांधने वाले होते हैं। बांधने का मतलब है अपना फल देकर व्यक्ति को जगत में फंसाए रखने वाले होते हैं क्योंकि ये कर्म आसक्ति और अहंकार से किए जाते हैं। वहीं, कुछ दूसरे प्रकार के कर्म होते हैं, जिनमें हम कर्म तो करते हैं, लेकिन उनका फल हमारे चित्त में इकट्ठा नहीं होता! ऐसे कर्मों को करने की तकनीक भगवान बताते हैं कि कर्म ऐसे किया जाए कि उसके फल में आसक्ति न रहे! इसके लिए भगवान कहते हैं कि तू इन कर्मों को मुझे अर्पण कर दे। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति के अंदर कर्म करने का अहंकार नहीं रहता और उस कर्म के फल की इच्छा भी नहीं रहती।