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ज्योतिष

पति पत्नी संध्या के समय भूल कर भी ना बनाएं शारीरिक संबंध नहीं तो पैदा होती हैं ऐसी संतान 😭…

शास्‍त्रों के अनुसार, इस तिथि और इस घड़ी नहीं बनाने चाहिए स्‍त्री-पुरुषों को यौन संबंध

1/7 रात्रि के इस पहर में यौन संबंध बनाने के होते हैं ये गंभीर परिणाम

शास्‍त्रों में स्‍त्री-पुरुष मिलन के लिए विशेष घड़ी का आयोजन है। विष्‍णुपुराण में कुछ दिन और कुछ प्रहर बताए गए हैं जो रतिक्रिया के लिए उचित नहीं है। संतान का निर्धारण भी रतिक्रिया के समय पर निर्भर करता है। ऐसे में पति-पत्‍नी के लिए यह जानना जरूरी हो जाता है कि यौन संबंध बनाने का सही वक्‍त क्‍या होना चाहिए:

2/7 रात्रि का प्रथम प्रहर है सबसे शुभ

धर्मशास्‍त्रों में रात्रि के प्रथम प्रहर को रतिक्रिया के लिए उचित बताया गया है। रात्रि के प्रथम प्रहर में संबंध बनाने पर जो संतान प्राप्त होती है वह भाग्यवान होती है।

3/7 भाग्‍य की धनी होती हैं ऐसी संतान

रात्रि का प्रथम प्रहर रात 12 बजे तक माना गया है। इस वक्‍त तक बनाए गए संबंध से उत्पन्न हुई संतान धार्मिक, सात्विक, अनुशासित, संस्कारवान, माता-पिता से प्रेम रखने वाली, धर्म का कार्य करने वाली, यशस्वी एवं आज्ञाकारी होती है। संतान दीर्घायु एवं भाग्यशाली होती है।

4/7 प्रथम पहर के बाद संबंध बनाना है अवगुणकारी

प्रथम प्रहर के बाद राक्षसगण पृथ्‍वी लोक के भ्रमण पर निकलते हैं। ऐसा इसलिए भी कहा जाता है कि मध्यरात्रि से नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है। वैसा इसक वैज्ञानिक तथ्य कितना है यह नहीं कहा जा सकता है। लेकिन शास्त्रों की मानें तो इस दौरान रतिक्रिया से पैदा होने वाली संतान में अवगुण आने की आशंका अधिक रहती है।

5/7 इन पांच तिथियों में भी स्‍त्री-पुरुषों को रखना चाहिए संयम

अमावस्‍या, पूर्णमासी, संक्रांति और चतुर्थी, अष्‍टमी तिथि पर भी कामेच्‍छा का त्‍याग करते हुए स्‍त्री-पुरुषों को भगवत भजन में मन लगाना चाहिए।

6/7 रविवार को भी न करें ये काम

शास्त्रों के अनुसार रविवार का दिन भी संतानोत्पत्ति के उद्देश्य से यौन संबंध के लिए अच्छा नहीं माना गया है। ऐसा करने से स्‍त्री-पुरुष और होने वाली संतान को मृत्‍यु लोक में कष्‍ट प्राप्त होता है।

7/7 पितृ पक्ष और व्रत के दिन भी रहें दूर

महिला और पुरुषों को पितृपक्ष और व्रत के दिन भी यौन संबंध से परहेज रखना चाहिए।

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