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म’हिलाओं के इ’न अं’गों प’र न’हीं हो’ने चा’हिए बा’ल, वर’ना हो जा’एगी प’ति की ज’ल्दी ही..जा’निए…

धार्मिक ख़बर

महि’लाओं के शरी’र प’र बा’ल क’म हो’ते है ब’ल्कि पु’रुषों के श’रीर प’र अधि’क बा’ल हो’ते है। ह’म स’भी लो’गों को प’ता है कि जि’न महि’लाओं के बा’ल लं’बे औ’र घ’ने हो’ते हैं व’ह महि’लाएं भाग्य’शाली हो’ती हैं। औ’र जि’न म’हिलाओं की प’लक के बा’ल का’ले हो’ते हैं वह महि’लाएं भी का’फी भाग्य’शाली मा’नी जा’ती हैं।

इ’न जग’हों प’र न’ही हो’ने चा’हिए बा’ल:
ले’किन महिला’ओं के श’रीर के कु’छ अं’ग ऐ’से भी हो’ते हैं ज’हां प’र बा’लों का हो’ना शु’भ बिल्कु’ल भी न’हीं मा’ना जा’ता है जि’न महि’लाओं के हा’थों प’र बा’ल का’फी सा’रे हो’ते हैं व’ह महि’लाएं का’फी गु’स्से वा’ली हो’ती हैं औ’र य’ह छो’टी-छो’टी बा’तों प’र दू’सरे लो’गों से उल’झने लग’ती हैं।

पु’रुष के लि’ए हो’ते है शु’भ:
जब’कि जि’न पु’रुष के हा’थों प’र का’फी सा’रे बा’ल हो’ते हैं व’ह पुरु’ष शु’भ मा’ने जा’ते हैं। य’ह पु’रुष बु’द्धि के का’फी ते’ज औ’र अधि’क ज्ञा’नी हो’ते हैं। जि’न पु’रुष के हा’थों प’र क’म बा’ल या बा’ल बिल्कु’ल हो’ते ही न’हीं हैं। व’ह पुरु’ष मत’लबी हो’ते हैं। य’ह दूस’रे व्य’क्ति को परे’शान क’रते र’हते हैं औ’र कि’सी भी व्य’क्ति को खु”श न’हीं दे’ख सक’ते हैं।