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कभी ना करें ये कर्म नहीं तो मिलेगा कुत्ते का जन्म😱😱…

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अगले जन्म में आप क्या बनेंगे, जानिए यहां

किसी भी जन्म में यदि बुरे काम किए हैं तो उसका परिणाम भोगे बिना उससे मुक्ति नहीं मिलती।

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दिल्ली. कर्म के अनुसार ही सभी के जीवन का फल तय होता है। क्योंकि ये कर्म को प्रधान माना गया है। हिन्दू धर्म के अनुसार व्यक्ति का मौजूदा जीवन ना केवल उसके द्वारा किए जा रहे कर्मों से बनता है, अपितु उसके पिछले जन्म में किए गए अच्छे-बुरे कर्मों का योगदान भी इसी जन्म में होता है। लोगों को चाह होती है कि उन्हें झट से पता चल जाए कि अगले जन्म में वह कौनसी योनि में जाने वाले हैं, कौनसा जन्म मिलने वाला है? मनुष्य योनि ही मिलेगी या कोई और। ऐसे ही हजारों सवाल आपके भी मन में घूम रहे होंगे तो चलिए आज आपको इन सवालों के जवाबों से अवगत कराते हैं।   

 ऐसा माना जाता है कि कई वर्षों पहले ऋषियों ने महर्षि वाल्मीकि से जब ये पूछा कि मनुष्य योनि में किस कर्म से कौन सा जन्म मिलता है तो उन्होंने कुछ अचंभित कर देने वाली बातें बताई। जिसका कुछ ऋषियों द्वारा लिखे गए पुराणों में पता चलता है। – जो मनुष्य परायी स्त्री से संबंध बनाता है उसे भयानक नर्क में जाना पड़ता है। यहां उसे कई दण्ड भोगने पड़ते हैं और इस सबके बाद उसे एक के बाद एक विभिन्न जन्म मिलते हैं। 

 वह सबसे पहले भेड़िया बनता है और फिर एक कुत्ते के रूप में जन्म लेता है। इसके बाद वह सियार, गीद्ध, सांप, कौआ बनता है। इन सभी जन्मों को भोगने के बाद ही अंत में वह बगुले का जन्म प्राप्त करता है, जिसे समाप्त करने के पश्चात उसे मनुष्य योनि की प्राप्ति होती है। – मनुष्य योनि में रहकर यदि कोई किसी बात चोरी-छिपे सुनता है तो उसे सरीसृप जीव यानि छिपकली का जन्म मिलता है। 

 – जो व्यक्ति अपने बड़े भाई का अपमान करता है, समाज के सामने उसे नीचा दिखाता है, अगले जन्म में वह व्यक्ति एक ‘कौंच’ नाम के पक्षी के रूप में जन्म लेता है। इस जन्म को वह 10 वर्षों तक भोगता है और यदि ईश्वरीय कृपा हो जाए तो ही उसे अगले जन्म में मनुष्य योनि मिलती है। यदि आप इस जन्म में पाप कर रहे हैं, तो इसका भुगतान भी अगले जन्म में करना होगा। महर्षि व्यास के अनुसार स्वर्ण की चोरी करने वाले व्यक्ति को कीड़े के रूप में जन्म मिलता है। जो व्यक्ति चांदी के सामान की चोरी करता है, वह कबूतर बनता है। – इसके अलावा जो व्यक्ति किसी के वस्त्रों की चोरी करता है, उसे अगले जन्म में तोता बनकर जन्म लेना होता है। सुगंधित पदार्थों की चोरी करने वाला व्यक्ति छछूंदर के रूप में जन्म लेता है। – किंतु यदि अपराध चोरी से बड़ा हो तो योनि और भी भयंकर प्राप्त होती है। महर्षि व्यास ने बताया है कि जो व्यक्ति शस्त्र से किसी की हत्या करता है उसे गधे की योनि प्राप्त होती है।

 गधे के बाद वह मृग योनि को प्राप्त करता है, किंतु इससे अधिक रोचक बात यह है कि उसकी खुद की हत्या भी शस्त्र से ही होती है। मृग के बाद ऐसी आत्मा मछली, कुत्ता, बाघ और अंत में मनुष्य योनि को पाती है। – देवताओं और पितरों को संतुष्ट किए बिना मरने वाला व्यक्ति सौ वर्षों तक कौए की योनि में रहता है। इसलिए कहा जाता है कि श्राद्ध कराते समय कौए को अवश्य भोजन कराएं, ताकि पितृगण संतुष्ट हो जाएं। 

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