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भूलकर भी ना करे ये कर्म नहीं तो मिलेगी कुत्ते और सुअर की योनि….

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हिंदू धर्म के अनेक ग्रंथों, जैसे- रामायण, महाभारत, गरुड़ पुराण आदि में कई ऐसे काम बताए गए हैं, जो मनुष्य के लिए करना महामाप बताये गए है, जिन्हें भूलकर भी नहीं करना चाहिए, यदि कोई मनुष्य इन वर्जित कामों को करते हैं, उन्हें कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिनकी वजह से घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान नहीं मिलता है, साथ ही शास्त्रों के ज्ञाता तो यहां तक कहते हैं कि अगर कोई इन कार्यों को करते हैं तो उन्हें धरती से लेकर स्वर्ग लोक तक अपयश यानी की अपमान ही अपमान सहना पड़ता हैं ।

1- जो लोग धनी हैं, लेकिन घर-परिवार की जरुरतों पर खर्च नहीं करते हैं, धन के लिए लालच करते हैं, उन्हें समाज में सम्मान प्राप्त नहीं हो पाता है । घर में रखे हुए धन को आवश्यकता पड़ने पर भी खर्च न करने या कंजूस होने पर धन की लालसा और अधिक बढ़ती है । इससे व्यक्ति और अधिक पैसा कमाने के लिए गलत काम कर सकता है, इन्हीं गलत कार्यो के कारण समाज में अपयश होता है । लालच बुरी बला है, ठीक इसी प्रकार व्यक्ति भी धन के लोभ में फंसकर अनेक परेशानियों से घिर जाता है ।

2- जो मनुष्य अपनी आय से अधिक खर्च करते हैं, अत्यधिक दान करते हैं, उन्हें अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं । दान तो करना चाहिए पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार जो आय से अधिक दान करते हैं, आमदनी कम होने या धन अभाव होने पर भी फिजूल के शौक पूरा करते है, फिजूलखर्च कर्जदार बना देता है और इसी कारण पूरा परिवार संकट में फंसा जाता है, ऐसा करने पर अपमान ही मिलता है ।

3- अच्छी या बुरी संगति का असर हमारे जीवन पर होता है, यदि हमारी संगत गलत लोगों के साथ है तो कुछ समय तो सुख की अनुभूति होगी, लेकिन परिणाम बहुत बुरा हो सकता है, बुरी संगत से बचना चाहिए, इस बात के कई उदाहरण है, जहां दुष्टों की संगत में लोग बर्बाद हुए हैं, दुर्योधन के साथ कर्ण, रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद श्रेष्ठ उदाहरण है, हमें दुष्ट लोगों का साथ छोड़ देना चाहिए ।

4- जो लोग स्वयं के स्वार्थ को पूरा करने के लिए दूसरों का अहित करते हैं, उन लोगों को इस काम के भयंकर परिणाम भुगतने पड़ते हैं, इस घृणित कार्य से व्यक्ति के साथ उसके परिवार को भी अनेक कष्टों का सामना व अपमान सहना पड़ता है । शास्त्रों में बताया गया है कि जो व्यक्ति जैसा कर्म करेगा, उसे वैसा ही फल प्राप्त होगा । हम अच्छें काम करेंगे तो अच्छा फल मिलेगा और बुरे काम करेंगे तो बुरा फल मिलेगा । ऐसे लोगों को समाज के साथ साथ परिवार में अपमान का पात्र बनना पड़ता है ।

5- जो मनुष्य दूसरों की वस्तु हड़पने या चुराने का प्रयास करता है, वह महापापी माना जाता है, किसी और की वस्तु को छल से पाने या चुराने में मनुष्य के जीवन के सभी पुण्य कर्म नष्ट हो जाते हैं, चोरी की हुई वस्तु से कभी भी लाभ नहीं मिलता, बल्कि उसकी वजह से नुक्सान का ही सामना करना पड़ता है, दान न करने वाला भी महापापी होता है ।