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इस मंदिर में की जाती है राक्षसों की पूजा आखिर क्यों किया जाता है ऐसा…..

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आपने देवताओं के तो बहुत सारे मंदिर देखे होंगे। लेकिन क्या आपने किसी असुर का मंदिर देखा है। जी हां देवभूमि में आपको असुर का मंदिर भी देखने को मिल जाएगा और ये भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां असुर राहू को पूजा जाता है।

Uttrakhand: वो मंदिर…जहां कैदखाने में बंद हैं भगवान !

पौड़ी जिले में कोटद्वार से करीब 150 किलोमीटर दूर थलीसैण ब्लॉक में राहु मंदिर मौजूद है…इस मंदिर की वास्तुकला तो बेहद आकर्षक है ही लेकिन उससे भी ज्यादा ये मंदिर भगवान शिव के साथ असुर राहू की पूजा के लिए मशहूर है। जी हां इस मंदिर में भगवान के साथ साथ असुर राहु की भी पूजा होती है और तो और यहां दूर-दूर से लोग पूजा करने के लिए आते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर में पूजा करने से कुंडली में मौजूद राहु दशा शांत हो जाती है।

कहते हैं कि जब समुद्र मंथन से निकले अमृत को राहु ने धोखे से पी लिया था तो भगवान विष्णु ने राहु के सिर को धड़ से अलग कर दिया था। राहु का सिर धड़ से अलग होने के बाद उत्तराखंड में जिस जगह पर गिरा वहीं पर भगवान शिव के साथ राहु का मंदिर बना दिया गया। स्कंद पुराण में तो इस मंदिर का भी जिक्र है।

आपने देवताओं के तो बहुत सारे मंदिर देखे होंगे। लेकिन क्या आपने किसी असुर का मंदिर देखा है। जी हां देवभूमि में आपको असुर का मंदिर भी देखने को मिल जाएगा और ये भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां असुर राहू को पूजा जाता है।

Uttrakhand: वो मंदिर…जहां कैदखाने में बंद हैं भगवान !

पौड़ी जिले में कोटद्वार से करीब 150 किलोमीटर दूर थलीसैण ब्लॉक में राहु मंदिर मौजूद है…इस मंदिर की वास्तुकला तो बेहद आकर्षक है ही लेकिन उससे भी ज्यादा ये मंदिर भगवान शिव के साथ असुर राहू की पूजा के लिए मशहूर है। जी हां इस मंदिर में भगवान के साथ साथ असुर राहु की भी पूजा होती है और तो और यहां दूर-दूर से लोग पूजा करने के लिए आते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर में पूजा करने से कुंडली में मौजूद राहु दशा शांत हो जाती है।

कहते हैं कि जब समुद्र मंथन से निकले अमृत को राहु ने धोखे से पी लिया था तो भगवान विष्णु ने राहु के सिर को धड़ से अलग कर दिया था। राहु का सिर धड़ से अलग होने के बाद उत्तराखंड में जिस जगह पर गिरा वहीं पर भगवान शिव के साथ राहु का मंदिर बना दिया गया। स्कंद पुराण में तो इस मंदिर का भी जिक्र है।