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इस अंग्रेज भक्त के साथ जो हुआ….वह जान कर दिल खुश हो जायेगा कृपया2 मिनट निकाल कर पोस्ट अवश्य पढ़ें !

कुछ बातें ऐसी होती है जिनको हम विज्ञान के द्वारा नहीं समझा सकते यूं कहें तो यह बातें विज्ञान के भी परे हैं।

🙏 दिल खुश हो जायेगा 🙏
कृपया 2 मिनट निकाल इस पोस्ट को अवश्य पढे।

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रोनाल्ड निक्सन जो कि एक अंग्रेज थे कृष्ण प्रेरणा से 0ब्रज में आकर बस गये …
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उनका कन्हैया से इतना प्रगाढ़ प्रेम था कि वे कन्हैया को अपना छोटा भाई मानने लगे थे……
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एक दिन उन्होंने हलवा बनाकर ठाकुर जी को भोग लगाया पर्दा हटाकर देखा तो हलवे में छोटी छोटी उँगलियों के निशान थे ……
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जिसे देख कर ‘निक्सन’ की आखों से अश्रु धारा बहने लगी …
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क्यूँ कि इससे पहले भी वे कई बार भोग लगा चुके थे पर पहलेकभी ऐसा नहीं हुआ था |
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और एक दिन तो ऐसी घटना घटी कि सर्दियों का समय था, निक्सन जी कुटिया के बाहर सोते थे |
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ठाकुर जी को अंदर सुलाकर विधिवत रजाई ओढाकर फिर
खुद लेटते थे |
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एक दिन निक्सन सो रहे थे……
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मध्यरात्रि को अचानक उनको ऐसा लगा जैसे किसी ने उन्हें
आवाज दी हो… दादा ! ओ दादा !
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उन्होंने उठकर देखा जब कोई नहीं दिखा तो सोचने लगे हो
सकता हमारा भ्रम हो, थोड़ी देर बाद उनको फिर सुनाई दिया…. दादा ! ओ दादा !
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उन्होंने अंदर जाकर देखा तो पता चला की वे ठाकुर जी को रजाई ओढ़ाना भूल गये थे |
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वे ठाकुर जी के पास जाकर बैठ गये और बड़े प्यार से बोले…
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”आपको भी सर्दी लगती है क्या…?”
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निक्सन का इतना कहना था कि ठाकुर जी के श्री विग्रह से आसुओं की अद्भुत धारा बह चली…
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ठाकुर जी को इस तरह रोता देख निक्सनजी भी फूट फूट कर रोने लगे…..
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उस रात्रि ठाकुर जी के प्रेम में वह अंग्रेज भक्त इतना रोया कि उनकी आत्मा उनके पंचभौतिक शरीर को छोड़कर बैकुंठ को चली गयी |


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हे ठाकुर जी ! हम इस लायक तो नहीं कि ऐसे भाव के साथ आपके लिए रो सकें…..
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पर फिर भी इतनी प्रार्थना करते हैं कि….
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”हमारे अंतिम समय में हमे दर्शन भले ही न देना पर……
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अंतिम समय तक ऐसा भाव जरूर दे देना जिससे आपके लिए तडपना और व्याकुल होना ही हमारी मृत्यु का कारण बने….”.
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बोलिये वृन्दावन बिहारी लाल की जय.
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Jai Shri Radhey Radhey
जय श्रीकृष्णा🙏