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जन्म कुंडली में पाप कर्तरी योग के फल

पापकर्तरीयोग

लग्न से दूसरे व द्वादश भाव मे क्रूर ग्रह स्थित हो तो पापकर्तरी योग का निर्माण होता है
ऐसे में लग्न का पीड़ित होने से जीवन मे संघर्ष, रुकावट,अड़चन बनी रहती है
स्वास्थ्य आदि की समस्या भी बनी रहती है एक रोग ठीक होता ह तो दूसरा शुरू हो जाता है उसको हर कार्य के लिए विशेष प्रयास करने पड़ते हैं सफलता मिलने में देरी होती है।

किसी भी भाव या ग्रह के द्वितीय व द्वादश भाव मे क्रूर ग्रह हो तो उस भाव व ग्रह के फल को प्रभावित व निर्बल करते हैं व उससे सम्बंधित फल मिलने में संघर्ष बनता है।

चन्द्र के द्वादश व द्वितीय भाव मे उक्त स्थिति हो तो भी पापकर्तरी योग का निर्माण होता है ऐसे में जातक सही निर्णय नही ले पाता है, मानसिक तनाव, डिप्रेशन, माइग्रेन के शिकार हो जाता है व चन्द्र से जुड़े फ्लो में परेशानी होती है

🙏जय श्री राम 🙏