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आपके घर में मन्दिर किस दिशा में है ? क्या आप उस दिशा के हिसाब से उस दिशा के देवी या देवता की वहां पर पूजा कर रहे हैं….!

आपके घर में मन्दिर किस दिशा में है क्या आप उस दिशा के हिसाब से उस दिशा के देवी या देवता की वहां पर पूजा कर रहे हैं
सबसे पहले यह जान लेना बहुत जरूरी है की मंदिर है क्या
मंदिर या पूजा स्थान वो स्थान है यहाँ पर हम कुछ देर के लिए बैठ कर अपने मन की शुद्धि करते है भगवन को हम अपनी व्यथा सुनाते है इस लिए लिए यह जगह बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाती है यहाँ हम भगवन को अपने समीप समझते है और उन से अपने दुःख सुख की बातें भी करते है। वहां पर हम अपने इष्ट देव को बैठते कई देवी देवताओं की पूजा करते है जिनमे हमे पुरण विश्वास है। मंदिर हमेशा घर में बहुत ही शुद्ध एवं साफ सुथरी जगह पर ही होना चाहिए यहाँ पर घर के सदस्यों के इलावा कोई भी बाहर वाला न जा सके और वहां पर गंदगी या चपल-जूते नही ले जाने चाहिए और कभी भी मंदिर वाले कक्ष या पूजा रूम में कुछ खाना चाहिए और जूठे बरतन तो कतई वहां पर नहीं रखने चाहिए बहुत से ऐसे और भी सिद्धान्त है जो पूजा कक्ष के लिए बहुत जरूरी है इसलिए मैं तो घर में मंदिर बनाने की कभी भी सलाह नही देता हां अगर अलग से पूजा कक्ष बना है तो उसमे सभी बातो का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
वैसे तो मंदिर को इक निश्चित स्थान उत्तर पूर्व के कोने में दीया गया है क्योंकि यह देवताओं का स्थान है पर आज कल जगह की कमी की वजह से जो लोग यहाँ पर मंदिर नही बना सकते उनके लिए मैं यहां पर बताना चाहूंगा कि आपका मन्दर जिस दिशा में भी है उस जोन के हिसाब से जो भी उस जोन का देवी या देवता है आप उस जगह उस देवी या देवता की फ़ोटो रखकर जा मूर्ति लगाकर पूजा करें तो वह मन्दर आपको फलदायी होगा क्योंकि वास्तु अनुसार हर दिशा का कोई न कोई देवी या देवता होता है जिस दिशा में भी आपके घर में मंदिर है उस दिशा अनुसार उस एरिया के देवी या देवता का पता आप कर सकते हैं हम घर के हर जोन के हिसाब से आपको बता देंगे के घर में आपका मन्दिर किस जगह पर है और वहां पर किस देवी या देवता की पूजा करने से आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे।

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