Categories
धर्म

चाणक्य नीति- ऐसे लोग होते हैं Life में सदा परेशान!

धर्म समाचार

हिंदू धर्म से जुड़े कई शा’स्त्र हैं, जिसमें मानव जी’वन से जुड़ी बहुत सी बातें लिखी हैं। तो वहीं कई ऐसे भी ग्रंथ और हैं जिनमें ऐतिहा’सिक बातें व’र्णित हैं, साथ ही साथ इनमें जीवन जीने का सरल तरीका आदि उल्ल’खित है। इन्हीं में से एक है आचार्य चाण’क्य का नीति सूत्र जिसे कोई आम शास्त्र नहीं बल्कि किंग’मेकर चाणक्य के नाम से भी जाना जाता है। जी हां, इसका कारण है आचार्य चाण’क्य द्वारा बताई गई उनकी खास नीतियां। जिसमें उन्होंने मानव जी’वन के लगभग हर पहलू के बारे में बात की है। जिसमें हम आज बात करने वाले हैं उनके द्वारा बताए गए उन लोगों के बारे में जो अपने जीवन में कभी खुश नहीं रह पाते। जी हां, बल्कि कहा जाता है ऐसे 4 तरह के लोग होते हैं जीवन भर दुखी ही रहते हैं। तो आईए देर न करते हुए आपको बता’ते हैं इन कौन से होते हैं वो लोग-

जो व्य’क्ति अपने जीवन में किसी से भी कर्ज लेता है चाणक्य नीति में यह कहा गया है कि कर्ज लेने वाला व्यक्ति कुछ देर के लिए बहुत खुशी मह’सूस करता है कि उसके पास धन आ गया लेकि’न उस धन को चुकाने के लिए वह हर पल चिंता में पड़ा रहता है। इसलिए इस दुनिया में कर्जा लेने वाले व्यक्ति से ज्यादा दुखी और कोई नहीं हो स’कता है। कर्ज लेने वाला व्यक्ति जीवन भर दुखी रहता है।

हमारी जिंदगी में कुछ ऐसे संबंध होते हैं जिनसे हम बहुत प्रेम करते हैं जब कोई व्यक्ति ऐसे सच्चे रि’श्तों को खो देता है तो उसे जिंदगीभर के लिए दुख सहना पड़ता है। क्योंकि सच्चे रिश्ते जिंदगी में बार-बार लौट कर नहीं आते हैं। इसलिए सच्चे रि’श्तों को खोने वाला व्यक्ति अपना जीवन उन रि’श्तों और उनके साथ बि’ताए पलों को याद करके दुख में बिता देता है।

जिन लोगों को छोटी उम्र में ही दुनि’या की स’मझ हो जाती है ऐसे लोग जीवन दुख में बिताते हैं। क्योंकि वह छोटी उ’म्र में ही सम’झ जाते हैं कि इस दुनिया में खुशियां बहुत कम और दुख बहुत ज्यादा है। इसलिए उनका दुनिया से विश्वा’स उठ जाता है और वह दुखी रहने ल’गते हैं। इन लोगों को छोटी उम्र में ही दु’निया, दुनिया’दारी और यहां के रिश्ते-नातों की गहरी सम’झ हो जाती है।

जो लोग दूसरों को परखने में कम’जोर होते हैं वह बहुत दुखी रहते हैं। परखने में कमजोर लोगों को कदम-कदम पर विश्वा’सघात का सामना करना पड़ता है। इसलिए जो लोग दूसरों की पह’चान करना न जानते हों वह अपना जीवन दुख में ही व्यतीत करते हैं। अगर साथ ही वह कान के कच्चे भी हों यानी दूसरों की बात पर बिना तथ्यों के भी यकी’न कर लेते हों तो इन लोगों का दुख कभी ख’त्म नहीं हो पाता है।