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वा’स्तु टि’प्स: इ’न 3 रं’ग के व’स्त्र पहन’कर क’भी न जा’ए अ’च्छे का’म के लि’ए, न’हीं मिले’गी सफ’लता, जा’निए कौ’न से है…

धार्मिक खबर

वा’स्तु शा’स्त्र घ’र में प्रयो’ग कि’ए जा’ने वा’लें रं’गो से लेक’र आ’प कि’स रं’ग के व’स्त्र पह’नते हैं इ’स बा’त का भी जीव’न प’र बहु’त प्रभा’व प’ड़ता है। वा’स्तु के अनुसा’र घ’र के प’र्दे, चाद’र या प’हनने वा’ले कप’ड़े, इ’न स’भी का रं’ग ब’हुत ही सो’च-सम’झकर चु’नना चाहि’ए, सा’थ ही इन’की स्व’च्छता का भी पू’रा ध्या’न र’खना चा’हिए। कप’ड़े ही कि’सी भी इंसा’न के व्य’क्तित्व को द’र्शाते हैं। वा’स्तु के अनु’सार कु’छ रं’ग ऐ’से हो’ते हैं जो व्य’क्ति में आत्म’विश्वास को ब’ढ़ाते हैं तो व’हीं कु’छ रं’गों को का’रण नका’रात्मकता आ’ती है। तो च’लिए जा’नते हैं कि कौ’न से रं’ग के क’पड़े पहन’ना शु’भ र’हता है औ’र कि’स रं’ग के कप’ड़ो से क’रना चाहि’ए पर’हेज….

वा’स्तु के अनु’सार य’दि कि’सी व्य’क्ति के अं’दर आत्म’विश्वास की क’मी हो तो उ’से अप’ने क’पड़ों ला’ल रं’ग ज्या’दा जग’ह दे’नी चा’हिए। ला’ल रं’ग के क’पड़े प’हनने से व्य’क्ति में उत्सा’ह, ऊ’र्जा त’था प्र’बल इ’च्छाशक्ति उत्प’न्न हो’ती है।

वा’स्तु शा’स्त्र के मुता’बिक य’दि कि’सी व्य’क्ति को ल’गता है कि उ’सके जी’वन में प्रेर’णा की क’मी है तो उ’से पी’ले रं’ग के व’स्त्रों को ज्या’दा धा’रण कर’ना चा’हिए। पी’ला रं’ग पह’नने से व्य’क्ति अ’पने का’र्य एका’ग्रता बढ़’ती है। व’ह चुनौ’तियों को पू’र्ण क’रने वा’ला औ’र का’र्य पसं’द बन’ता है।