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होने वाला है कलयुग का अन्त.. पुराणों में दी गई चेतावनी के अनुसार जल्द ही होने वाला है भगवान कल्कि का जन्म, जानिए कैसे दिखेंगे😱…….

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है कलयुग का अन्त पुराणों में दी गई चेतावनी के अनुसार जल्द ही होने बाला है भगवान कलकी का जन्म जानिए कैसे

Kalyug Kalki Avtar: पुराणों के अनुसार कलियुग के 5 हजार वर्ष बीत जाने के बाद पृथ्‍वी पर पाप का साम्राज्य होगा। ढोंगी और पाखंडी भक्तों और साधुओं का बोलबाला होगा। ढोंगी संतजन धर्म की गलत व्याख्‍या कर समाज को दिशाहीन कर देंगे, धरती पर मनुष्यों के पाप को धोने वाली गंगा स्वर्ग लौट जाएगी।: Kalyug: ऐसा कहा जाता है कि ये कलयुग चल रहा है। सनातन धर्म और वेदों में चार युगों की मान्यता है। जिसके अनुसार सतयुग में स्वयं देवता, किन्नर और गंधर्व धरती पर निवास करते थे। त्रेता युग में श्रीराम का जन्म हुआ था। फिर द्वापर युग में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। वर्तमान में चर रहे कलयुग का कालखंड सबसे छोटा कहा गया है। माना जाता है कि कलयुग में भगवान विष्णु का दसवां अवतार होगा जिसका नाम होगा कल्कि (Kalki)।
ऐसा होगा कलयुग: विष्णु पुराण में कलयुग से संबंधित कई जानकारी दी गई है। जिसके अनुसार इस युग में पाप इतना अधिक होगा कि पूरी सृष्टि का ही संतुलन बिगड़ जायेगा। मनुष्य की आयु घटकर 20 वर्ष ही रह जायेगी। कलियुग में लोगों के बाल अल्पायु में ही सफेद होने लगेंगे। पुराण में बताया गया है कि चालाक और लालची व्यक्ति को कलयुग में विद्वान माना जायेगा। शास्त्रों और वेदों का पालन कोई नहीं करेगा। धर्मगुरु अपने फायदे के लिए लोगों का इस्तेमाल करेंगे।
: पुराणों के अनुसार कलियुग के 5 हजार वर्ष बीत जाने के बाद पृथ्‍वी पर पाप का साम्राज्य होगा। ढोंगी और पाखंडी भक्तों और साधुओं का बोलबाला होगा। ढोंगी संतजन धर्म की गलत व्याख्‍या कर समाज को दिशाहीन कर देंगे, धरती पर मनुष्यों के पाप को धोने वाली गंगा स्वर्ग लौट जाएगी। पुराणों में बद्री-केदारनाथ के रूठने का जिक्र मिलता है। भविष्योत्तर पुराण अनुसार ब्रह्माजी ने कहा- हे नारद! भयंकर कलियुग के आने पर मनुष्य का आचरण दुष्ट हो जाएगा और योगी भी दुष्ट चित्त वाले होंगे। संसार में परस्पर विरोध फैल जाएगा। द्विज (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य) दुष्ट कर्म करने वाले होंगे और विशेषकर राजाओं में चरित्रहीनता आ जाएगी। देश-देश और गांव-गांव में कष्ट बढ़ जाएंगे। संतजन दुःखी होंगे। अपने धर्म को छोड़कर लोग दूसरे धर्म का आश्रय लेंगे। देवताओं का देवत्व भी नष्ट हो जाएगा और उनका आशीर्वाद भी नहीं रहेगा। मनुष्यों की बुद्धि धर्म से विपरीत हो जाएगी और पृथ्वी पर म्लेच्छों के राज्य का विस्तार हो जाएगा। तो वहीं ब्रह्मवैवर्त पुराण में श्रीकृष्ण गंगा को बताते हैं कि कलियुग में एक स्वर्ण युग होगा। जिसकी शुरुआत कलियुग के 5 हजार वर्ष बाद होगी और यह सुनहरा युग अगले 10 हजार वर्ष तक चलेगा।

श्रीवेदव्यास जी के अनुसार, सभी युगों में कलयुग श्रेष्ठ: विष्णुपुराण में वर्णित एक घटना के अनुसार, मुनिजनों और ऋषियों के साथ चर्चा करते हुए वेदव्यास जी कहते हैं सभी युगों में कलयुग ही सबसे श्रेष्ठ युग है। क्योंकि दस वर्ष में जितना व्रत और तप करके कोई मनुष्य सतयुग में पुण्य प्राप्त करता है, त्रेतायुग में वही पुण्य एक साल के तप द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। ठीक इसी प्रकार उतना ही पुण्य द्वापर युग में एक महीने के तप से प्राप्त किया जा सकता है तो कलयुग में इतना ही बड़ा पुण्य मात्र एक दिन के तप से प्राप्त किया जा सकता है। इस तरह व्रत और तप के फल की प्राप्ति के लिए कलयुग ही सबसे श्रेष्ठ समय है।