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शरी’र के इ’स अं’ग को ब’ढ़ाने के लि’ए किशो’रावस्था में ज’रूर क’रें ये का’म, दे’खिए…

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किशो’रावस्था, जीव’न की वो अ’वस्था हो’ती है ज’ब मनु’ष्य का श’रीर बन’ता है। ऐ’से में क’ई सा’रे बद’लाव आ’ते हैं जै’से लंबा’ई का बढ़’ना, व’जन का घ’टना-बढ़’ना, आवा’ज में परिव’र्तन आ’दि। ऐ’से स’मय में ब’हुत जरू’री है कि यो’ग कि’या जा’ए। यो’ग क’रने से शा’रीरिक परि’वर्तन स’ही ढं’ग से हो’ते हैं। क’ई सा’रे ब’च्चों की किशो’रावस्था में लं’बाई न’हीं ब’ढ़ पा’ती है। जि’स वज’ह से उ’नके मा’ता-पि’ता बेह’द चिंति’त र’हते हैं। क’ई सा’रे लो’ग इस’के लि’ए त’रह-तर’ह के उप’चार भी कर’ते हैं प’र वा’स्तव में सि’र्फ यो’ग कर’ने से भी अ’च्छी लंबा’ई ब’ढ़ सक’ती है। अ’गली स्लाइ’ड्स से जा’निए कि’स तर’ह यो’ग क’रने से ब’ढ़ती है लं’बाई।  

पश्चि’मोत्तानासन
हाइ’ट बढ़ा’ने के लि’ए पश्चिमोत्ताना’सन इस’लिए लाभ’कारी है क्यों’कि इस’के अभ्या’स से पू’रा श’रीर स्ट्रे’च हो’ता है। इ’से क’रने के लि’ए पां’वों को लं’बे क’रके बै’ठ जा’इए। ध्या’न र’हे कि पां’व एक’दूसरे से चिप’के हु’ए हों। हा’थों को पै’र के अं’गुठे की ओ’र ले जा’ते हु’ए आ’गे की तर’फ झु’कें। 15 से 30 से’कंड त’क इ’से क’रने का प्रया’स क’रें। इ’से निय’मित रू’प से क’रें औ’र कोशि’श क’रें कि सि’र पू’रा घुट’ने को छू ले। ऐ’सा कर’ने से शरी’र अ’च्छे से स्ट्रे’च हो पा’ता है। 

हला’सन
लं’बाई बढ़ा’ने के लि’ए हसा’लन भी ए’क अ’च्छा वि’कल्प है। हला’सन क’रने के लि’ए कम’र के ब’ल ले’ट जा’एं औ’र हा’थों को शरी’र के सा’थ सटा’कर र’खें। अ’ब धी’रे-धी’रे अप’ने पै’रों को ऊप’र उठा’एं औ’र 90 डि’ग्री के को’ण त’क ले आ’एं। अ’ब सां’स छोड़’ते हु’ए पै’रों के सा’थ-सा’थ पी’ठ को भी उ’ठाएं औ’र पै’रों को पी’छे ले जा’ते हु’ए अं’गुठे को ज’मीन से स्प’र्श क’रने का प्रया’स क’रें। ज’ब त’क संभ’व हो इ’सी मु’द्रा में र’हें औ’र फि’र धी’रे-धी’रे सा’मान्य अ’वस्था में लौ’ट आ’एं औ’र विश्रा’म क’रें।

सर्वां’गासन
सर्वांगस’न कर’ने से लं’बाई बहु’त ते’जी से ब’ढ़ती है। सर्वांगस’न की खा’सियत य’ही है कि इ’से क’रने से सा’रे अं’गों की कस’रत हो जा’ती है। ज’ब सा’रे अं’गों की स’ही ढं’ग से क’सरत हो’ती है तो लं’बाई सं’तुलन के सा’थ बढ़’ती है। इ’से कर’ने के लि’ए पी’ठ के ब’ल सी’धे ले’ट जा’एं औ’र पै’रों को 90 डि’ग्री के को’ण में सी’धा क’र लें औ’र फि’र श’रीर को क’मर प’र हा’थ से सहा’रा दे’ते हु’ए ऊप’र की ओ’र उ’ठाएं। ज’ब शरी’र का सं’तुलन ब’न जा’ए तो हा’थों को ज’मीन प’र र’खें।

भुजंगा’सन
किशोरा’वस्था में तो भुजंगा’सन कर’ना ही चा’हिए। भुजं’गासन को क’रने के लि’ए स’बसे प’हले उ’लटे हो’कर पे’ट के ब’ल ले’ट जा’एं औ’र अप’ने ए’ड़ी औ’र पं’जे को मि’ला लें। ध्या’न र’खें कि आप’की को’हनी कम’र से स’टी हु’ई हों औ’र हथेलि’यां ऊ’पर की ओ’र हों। हा’थ को कोह’नियों से मो’ड़ते हु’ए धी’रे-धी’रे ला’एं औ’र हथे’लियों को अ’पनी बाजु’ओं के नी’चे र’ख दें फि’र ना’क को भू’मि में छू’ते हु’ए सि’र को आका’श की ओ’र उ’ठाएं। 15 से 20 सेकं’ड त’क इ’सी अव’स्था में र’हें।