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तर’बूज के आ’कार का नीं’बू दे’ख क’र ह’र को’ई हु’आ है’रान, इ’स कि’सान का न’या रिकॉ’र्ड हु’आ द’र्ज, दे’खें अ’द्भुत त’स्वीरें…

हिंदी खबर

साधा’रण तौ’र प’र नीं’बू का आ’कार का’फी छो’टा हो’ता है। वै’से तो नीं’बू की ऐ’सी क’ई प्रजा’तियां हैं, जिन’की बना’वट अल’ग-अल’ग तर’ह की हो’ती है। लेकि’न को’ई भी नीं’बू का आ’कार ह’थेली की लं’बाई से ज्या’दा ब’ड़ा न’हीं हो’ता है। अ’गर आ’पसे क’हा जा’ए कि ए’क नीं’बू का वज’न ढा’ई कि’लो औ’र आका’र तर’बूज की त’रह हो, तो आ’पको थो’ड़ा अजी’ब ज’रूर लगे’गा। मग’र हरि’याणा के हि’सार में ए’क कि’सान ने कु’छ इ’स तर’ह के नीं’बू उगा’ए हैं।

दरअ’सल, हि’सार में किश’नगढ़ के कि’सान विजें’द्र थो’री के खे’त में तरबू’ज के आ’कार के नीं’बू ल’ग र’हे हैं, जि’से दे’खने के लि’ए दू’र-दू’र से लो’ग आ र’हे हैं। सा’थ में नी’बू को लेक’र भी जा’ते हैं। जान’कारी के मुता’बिक, कि’सान के पौ’धे प’र ढा’ई से सा’ढे़ ती’न कि’लो के नीं’बू ल’ग र’हे हैं। इत’ने ब’ड़े आ’कार के नीं’बू देख’कर ह’र को’ई हैरा’न है। ब’ता दें कि कि’सान विजें’द्र थो’री ज’ल्द ही गिनी’ज बु’क आ’फ व’र्ल्ड रि’कार्ड में ना’म द’र्ज करा’ने के लि’ए आ’वेदन करें’गे।

कि’सान वि’जेंद्र थो’री ने कु’छ सा’ल पह’ले ही अ’पनी 7 एक’ड़ की ज’मीन प’र पं’जाब से ला’कर कि’न्नू के पौ’धे लगा’ए थे। उन्हों’ने बी’च-बी’च में मा’ल्टा, मौस’मी औ’र नीं’बू के पौ’धे भी ल’गा दि’ए थे। कि’न्नु के अ’लावा नीं’बू ल’गने शु’रू हो ग’ए हैं। अ’हम बा’त य’ह है कि पे’ड़ प’र ल’ग र’हे नीं’बू का’फी ब’ड़े आ’कार के हैं। विजें’द के खे’त में जो नीं’बू ल’ग र’हे हैं उन’का वज’न ढा’ई से सा’ढे़ ती’न कि’लो के आसपा’स है।

वि’जेंद्र ने इ’न पौ’धों को पू’री त’रह से आर्गे’निक खा’द डालक’र तैया’र कि’या है। ग्रामी’णों का मा’नना है कि इ’सी कार’ण नीं’बू का व’जन इत’ना अधि’क हो ग’या है। पे’ड़ प’र ल’ग रहे नीं’बू की च’र्चा सुन’कर ब’ड़ी ता’दाद में ग्रा’मीण पहुं’च र’हे हैं। इत’ना ही न’हीं लो’ग इ’न नीं’बुओं के सा’थ फो’टो भी खींच’वा र’हे हैं।

वि’जेंद्र थो’री ने इ’न नीं’बू को क’ई विशे’षज्ञों को भी दिखा’या, ले’किन कि’सी ने इस’की स’ही प्रजा’ति के बा’रे में को’ई दा’वा न’हीं कि’या है। सा’थ ही ब’ड़े आ’कार का य’ह नीं’बू पथ’री की बी’मारी में मरी’जों के लि’ए राम’बाण साबि’त हो र’हा है। कि’सान वि’जेंद्र थो’री का दा’वा है कि नीं’बू की शिंक’जी पी’ने से पू’रे गां’व में पथ’री का ए’क भी रो’गी न’हीं है।