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अभी अभी -: किसानों के बीच पहुंच अमित शाह ने किया ऐलान, जब तक मोदी हैं, तब तक…

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि जब तक नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं तब तक कोई कंपनी किसानों से उनकी जमीन नहीं छीन सकती। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था जारी रहेगी और मंडियां बंद नहीं होंगी। राष्ट्रीय राजधानी के किशनगढ़ गांव में लोगों को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि अगर किसान संगठन यह सोचते हैं कि नए कृषि का’नूनों का कोई भी प्रा’वधान उनके हितों के खि’लाफ है तो केंद्र सरकार इसपर चर्चा करने और खुले मन से विचार करने को तैयार है।

उन्होंने कहा कि वि’पक्ष कृषि कानूनों पर बेवजह हो’हल्ला मचा रहा है। उन्होंने किसानों को भरोसा दिया कि तीन कृ’षि सु’धार कानू’न उनके हित में हैं और उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाते। उन्होंने कहा, ‘‘ना तो न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) समाप्त होगी और ना ही आपकी जमीन कोई छीन सकता है। मैं किसानों को बताना चाहता हूं कि जब तक नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं, कोई भी का’र्पोरेट आपकी जमीन नहीं छीन सकता, यह आपको भाजपा का वादा है।’’ शाह ने कांग्रेस सहित वि’पक्ष पर न्यूनत’म समर्थन मूल्य (एमएसपी) और कृषि कानूनों के अन्य प्राव’धानों के बारे में भ्र’म फैलाने का आ’रोप लगाया।

उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष सरासर झूठ बोल रहा है। मैं फिर दोहराता हूं कि एमएसपी जारी रहेगी और मंडियां कभी बंद नहीं होंगी। किसानों का कल्याण मोदी सरकार की प्राथमिकता है।’’ उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास कोई मुद्दा नहीं है और वे अपने हितों की पूर्ति के लिए किसानों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं पूरे देश में किसानों को बताना चाहता हूं कि विपक्षी नेताओं के पास कोई मुद्दा नहीं है और वे झूठ फैला रहे हैं कि एमएसपी खत्म हो जाएगा। प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट किया है और अब मैं फिर से स्पष्ट करता हूं कि एमएसपी है और आगे भी रहेगा।’’

शाह ने कहा कि संप्रग नेताओं को एमएसपी के बारे में बोलने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि फसलों की लागत पर डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य की किसानों की मांग को पूरा करने के लिए उनके द्वारा कुछ भी नहीं किया गया था और यह मोदी सरकार द्वारा लागू किया गया। शाह ने यह दिखाने के लिए कृषि क्षेत्र में सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों को रेखांकित किया कि किस तरह से उसने किसानों के कल्याण को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि ‘‘राहुल बाबा’’ सहित विपक्षी नेताओं ने किसानों के लिए क’र्ज माफी की मांग की जब मोदी सरकार ने किसान सम्मान योजना शुरू की।

उन्होंने कहा, ‘‘संप्रग सरकार के दस वर्षों में 60,000 करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफ किए गए थे, जबकि मोदी सरकार ने ढाई साल में दस करोड़ किसानों के खातों में 95,000 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए और अब 18,000 करोड़ रुपये बिना किसी बिचौलिए के हस्तांतरित किये जा रहे हैं।’’ शाह ने कहा, ‘‘मैं उन लोगों से पूछना चाहता हूं जो किसानों के हित के बारे में बात करते हैं कि जब वे सत्ता में थे तब उन्होंने क्या किया था? 2009 से 2014 के बीच 3.74 लाख करोड़ रुपये के गेहूं और धान की खरीद हुई थी, जबकि मोदी सरकार ने 2014-19 में इसे बढ़ाकर 8.22 लाख करोड़ रुपये किया।’’

उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राकांपा प्रमुख शरद पवार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि किसानों की बात कौन कर रहा है? 2013-14 में किसानों के लिए क्या बजट था जब संप्रग और कांग्रेस सत्ता में थी। यह 21,900 करोड़ रुपये था। मोदी सरकार ने पिछले बजट में इसे बढ़ाकर 1.34 लाख करोड़ रुपये कर दिया।’’ शाह ने कहा कि मोदी द्वारा लाए गए कृषि सुधार के बारे में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) शासन के दौरान 2001 में शंकरलाल गुरु समिति और मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने उल्लेख किया था।