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शा’दी से पह’ले भूल’कर भी ना क’रें ये का’म, व’रना ससु’राल में न’हीं हो’गी आप’की इज्ज’त, प’ति भी र’हेगा आ’पसे…

हिंदी खबर

शा’दी के बा’द ह’र म’हिला को लग’ता है कि वे ए’क अ’च्छी गृह’णी बनक’र स’भी का दि’ल जी’त लें ले’किन ए’क अ’च्छी गृह’णी बन’ना क्या इत’ना आ’सान हो’ता है? ए’क अ’च्छी गृ’हणी बन’ने का य’ह स’फर बहु’त लं’बा हो’ता है। महिला’ओं को अ’च्छी गृ’हणी ब’नने, स’भी का दि’ल जी’तने में सा’लों ल’ग जा’ते हैं इस’लिए य’दि आ’प विवा’ह होते ही अ’च्छी गृह’णी बन’ने के स्व’प्न दे’ख र’ही हैं तो उ’सके लि’ए आ’पको अ’भी से तैया’रियां भी शु’रू क’र दे’ना चा’हिए। ए’क अ’च्छी गृह’णी ब’नने के लि’ए ऐ’से आ’पको को’ई ब’हुत कठि’न का’म न’हीं कर’ना है ब’स अ’पनी छो’टी- मो’टी आ’दतों में परि’वर्तन कर’ना है। अग’ली स्ला’इड्स से जा’निए कि’न आ’दतों को जी’वन में शा’मिल क’रने से आ’प ब’न स’कती हैं अ’च्छी गृह’णी।

स’भी की इच्छा’ओं का सम्मा’न कर’ना
घ’र में अ’भी से स’भी की इच्छा’ओं का ख्या’ल रख’ना शु’रू क’रें। ज’ब खा’ना ब’नाने की बा’त आ’ती है तो खु’द की प’संद को सब’से ऊ’पर रख’ने की ब’जाय य’ह दे’खें कि म’म्मी, पा’पा, भा’ई, ब’हन आ’दि को क्या प’संद है। इच्छा’ओं की ज’ब भी बा’त आ’ती है तो अप’ने से प’हले अ’पने नि’कटवर्ती लो’गों की इ’च्छा को तव’ज्जो दें। यकी’न मानि’ए आप’की इ’च्छा भी पू’री हो’गी।

एड’जस्टमेंट कर’ना
य’दि घ’र में को’ई आ जा’ता है तो जि’द प’र न अ’ड़े र’हें कि आ’प अप’ना बे’ड शे’यर न’हीं करें’गी। अ’च्छी गृह’णी ब’नना है तो अ’पने दि’ल को अ’भी से ब’ड़ा क’र लें। खु’शी- खु’शी ची’जों को शेय’र क’रें। को’ई खा’ने की ची’ज य’दि थो’ड़ी ही ब’ची है तो दि’माग लगा’एं कि कि’स त’रह व’ह स’ब के हि’स्से आ जा’ए क्यों’कि आ’गे च’लकर ससु’राल में इ’न स’भी ची’जों को आप’को संभा’लना हो’गा। 

स’ब की बा’त को स’मझें
अ’भी से अप’ने घ’र में छो’टे से छो’टे स’दस्य को सुन’ने औ’र सम’झने का प्र’यास क’रें। अ’पनी दि’नचर्या को प्रति’दिन दे’खें औ’र प’ता क’रें कि घ’र के कि’स स’दस्य को आ’प कि’तना सम’य दे’ते हैं। मा’ता- पि’ता की बा’तों को धेर्यपू’र्वक सु’नें। उन’की कि’सी भी बा’त प’र चिढ़’चिढ़ या गु’स्सा न क’रें। को’ई बा’त पसं’द न’हीं आ’ती है तो उ’से अ’लग-अल’ग पह’लुओं से सम’झने का प्रय’त्न क’रें। इ’स आ’दत से आ’प बहु’त ज’ल्दी ए’क अ’च्छी गृह’णी ब’न जाएं’गी।

न क’हना औ’र सुन’ना सी’खें
हो स’कता है अ’भी घ’र में को’ई भी आ’पको कि’सी बा’त के लि’ए न क’हता हो तो आ’प साम’ने वा’ले व्य’क्ति से रू’ठ जा’ती हों ले’किन ससु’राल में य’ह स’ब न’हीं चल’ता है। व’हां य’दि को’ई ब’ड़ा आप’को न कह’ता है तो आ’प उन’से ब’हस न’हीं क’र सक’ते। हां, लेकि’न आ’प उ’न्हें सम’झाने का प्र’यत्न अव’श्य क’र सक’ते हो। सा’थ ही को’ई बा’त आप’के स्वभा’व के विरु’द्ध हो या को’ई का’म आप न’हीं क’रना चा’हते हैं तो उस’के लि’ए भी आप’को न क’हने का तरी’का आ’ना चा’हिए।