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ज’ब लड़’के लड़’कियों के सा’थ क’रते है ये का’म, लड़’कियों को आ’ता है बहु’त म’जा, प’र क’हती न’हीं.. जा’निए….

हिंदी खबर

लड़’के औ’र लड़’कियां दो अल’ग-अल’ग ग्र’ह के प्रा’णी हैं। इन’की विचा’रधारा, आ’दतें एक’दूसरे से बहु’त ही अ’लग हो’ती हैं। जो बा’तें लड़’कों के लि’ए बेह’द सा’मान्य हो’ती हैं, बि’ल्कुल सं’भव है कि वे लड़’कियों के लि’ए ब’ड़ी बा’त हो औ’र लड़’के जि’न बा’तों को ले’कर गं’भीर हो’ते हों, हो स’कता है लड़’कियां उन’पर अ’धिक ध्या’न भी न दे’ती हों। आम’तौर प’र अधि’कतर क’पल्स में य’ह बा’त देख’ने में आ’ती हैं कि लड़’कियां लड़’कों की क’ई सा’री आद’तों के कार’ण बहु’त ज’ल्दी खी’झ जा’ती हैं। लड़’के सम’झ भी न’हीं पा’ते हैं कि सा’मने वा’ली लड़’की का जो अचा’नक से मू’ड ख’राब हु’आ है उस’के लि’ए पू’री त’रह से वे ही जिम्मेदा’र हैं, आ’गे चल’कर य’ही बा’तें बह’स का रू’प ले ले’ती हैं। अग’ली स्ला’इड्स में ह’म आ’पको ब’ता र’हे हैं लड़’कों की वे आद’तें जि’नसे लड़’कियां चि’ढ़ती हैं।

फो’न प’र बा’त क’रते-कर’ते सो जा’ना
रा’त में ज’ब अधि’कतर कप’ल्स फो’न प’र  बा’त क’रते हैं या चै’ट क’र र’हे हो’ते हैं त’ब लड़’कियां तो पू’री तल्लीन’ता से बा’त क’र र’ही हो’ती हैं लेकि’न ल’ड़के सो जा’ते हैं। क’ई बा’र तो ऐ’सा भी हो’ता है कि लड़’की को’ई गं’भीर बा’त ब’ता र’ही हो’ती हैं औ’र लड़’के सो जा’ते हैं। ऐ’सा हो’ने प’र अग’ले दि’न की ल’ड़ाई हो’ना भी त’य ही रह’ता है। इस’लिए य’दि आ’पको नीं’द आ र’ही है तो बे’हतर है कि आ’प सा’मने वा’ले को पह’ले से ही ब’ता दें। 

अप’शब्दों का प्र’योग
क’ई सा’रे लड़’कों की आ’दत र’हती हैं बा’त-बा’त में अ’पशब्द क’हने की है। ल’ड़के ज’ब अ’न्य ल’ड़कों के सा’थ हो’ते हैं तो अप’शब्द क’हना उ’नके लि’ए ब’हुत सा’मान्य बा’त हो’ती है ले’किन वे ज’ब लड़’कियों के सा’थ हो’ते हैं तो उ’न्हें इ’न बा’तों का खा’सकर बहु’त ध्या’न रख’ना हो’ता है। ले’किन क’भी-क’भी वे भूल’वश वे ये गल’ती क’र बैठ’ते हैं जि’ससे कि लड़’कियां अचा’नक ही अस’हज मह’सूस कर’ने लग’ती हैं। 

इध’र- उ’धर दे’खना
क’ई बा’र ऐ’सा हो’ता है कि ह’म कि’सी ज’गह प’र मौ’जूद हो’कर भी गैर’मौजूद र’हते हैं। य’दि लड़’कियों के सा’थ ऐ’सा हो’ता है कि वे को’ई बा’त क’ह र’ही हैं औ’र सा’मने वा’ला उ’से सु’न ही न’हीं र’हा है तो उन’का दि’माग ब’हुत ज्या’दा ख’राब हो जा’ता है। इस’लिए बेह’तर है कि ज’ब आ’प रि’श्ते को स’मय दे’ने के लि’ए नि’कले हैं तो आ’पका पू’रा ध्या’न उ’सी प’र हो ब’जाय कि आ’प इ’धर-उध’र देख’कर या कु’छ औ’र सो’चकर उ’स स’मय को न’ष्ट क’र दें।

बि’न बो’ले अ’न्य ल’ड़कियों की म’दद क’रना
लड़’कियां बहु’त अ’धिक चिढ़’ती हैं ज’ब आप’से कि’सी लड़’की ने म’दद न मां’गी हो औ’र आ’प उस’की म’दद कर’ने दौ’ड़ प’ड़े हैं। पु’रुष औ’र महि’लाएं दो’नों ही अप’ने-अ’पने स’माज को ब’हुत बेह’तर ढं’ग से जा’नते हैं। ऐ’से में वे ये भी जा’नते हैं कि ह’र व्य’क्ति अ’च्छा न’हीं हो’ता है इस’लिए ज’ब आ’प बि’न बो’ले कि’सी अ’न्य लड़’की की म’दद क’रने जा’ते हैं तो आ’पकी पा’र्टनर नारा’ज हो जा’ती है क्यों’कि वो म’न ही म’न ड’रती है कि क’हीं साम’ने वा’ली लड़’की आप’का उप’हास न ब’ना दे।