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Vivah Panchami 2020: आ’ज है वि’वाह पंच’मी आ’ज के दि’न क’रें ये का’म, मि’लेगा मन’चाहा जीव’नसाथी, औ’र हों’गी….

धार्मिक खबर

Vivah Panchami 2020: आ’ज विवा’ह पं’चमी मना’ई जा थी है है. हिं’दू पंचां’ग के अनुसा’र मा’र्गशीर्ष मा’स के शु’क्ल प’क्ष की पंच’मी ति’थि को भगवा’न रा’म और मा’ता सी’ता के विवा’ह का उत्स’व ह’र सा’ल मना’या जा’ता है. पौरा’णिक मान्यता’ओं के अ’नुसार, विवा’ह पंच’मी के दि’न ही भग’वान रा’म औ’र मा’ता सी’ता का वि’वाह सं’पन्न हु’आ था. इ’स दि’न पू’जा कर’ने से जा’तक की कुं’डली का दो’ष भी मि’ट जा’ता है. य’ह भी मान्य’ता है कि वि’वाह पंच’मी के दि’न जो जा’तक व्र’त औ’र पू’जा क’रते हैं उ’न्हें मन’चाहे जीवन’साथी की प्रा’प्ति हो’ती है. वि’वाह पंच’मी को श्री’राम पंच’मी या वि’हार पंच’मी के ना’म से भी जा’ना जा’ता है. इ’स दि’न नागदे’वता की पू’जा अर्च’ना का वि’धान है.आ’इए जा’नते हैं विवा’ह पंच’मी की पौरा’णिक क’था…
विवा’ह पंच’मी की क’था

पौरा’णिक मान्‍यता’ओं के अनु’सार, सी’ता मा’ता का ज’न्‍म ध’रती से हु’आ था. क’हा जा’ता है कि रा’जा जन’क ह’ल जो’त र’हे थे त’ब उ’न्‍हें ए’क ब’च्‍ची मि’ली औ’र उ’से वे अप’ने मह’ल में ला’ए व पु’त्री की त’रह पाल’ने ल’गे. उन्‍हों’ने उ’स ब’च्‍ची का ना’म सी’ता र’खा. लो’ग उ’न्‍हें ज’नक पु’त्री सी’ता या जा’नकी क’हकर पु’कारते थे. मान्‍य’ता है कि मा’ता सी’ता ने ए’क बा’र मंदि’र में र’खे भग’वान शि’व के धनु’ष को उ’ठा लि’या था. उस धनुष को परशुराम के अलावा किसी ने नहीं उठा’या था. उ’सी दि’न रा’जा जन’क ने नि’र्णय लि’या कि वो अप’नी पु’त्री का वि’वाह उ’सी के सा’थ क’रेंगे जो इ’स ध’नुष को उ’ठा पा’एगा. फि’र कु’छ सम’य बा’द मा’ता सी’ता के वि’वाह के लि’ए स्‍वयंव’र र’खा ग’या. स्‍वयं’मर के लि’ए क’ई ब’ड़े-ब’ड़े महा’रथियों, राजा’ओं औ’र राज’कुमारों को नि’मंत्रण भे’जा ग’या. उ’स स्‍वयं’वर में मह’र्षि व’शिष्‍ठ के सा’थ मर्या’दा पुरु’षोत्तम रा’म औ’र उ’नके छो’टे भा’ई लक्ष्‍म’ण भी दर्श’क दी’र्घा में उ’पस्थित थे.

स्‍वयं’वर शु’रू हु’आ औ’र ए’क-ए’क क’र स’भी रा’जा, धुरंध’र औ’र राज’कुमार आ’ए ले’किन उ’नमें से को’ई भी शि’व के ध’नष को उठा’ना तो दू’र उ’से हि’ला भी न’हीं स’का. य’ह देख’कर रा’जा ज’नक बेह’द दु’खी हो ग’ए औ’र क’हने ल’गे कि क्‍या मे’री पु’त्री के लि’ए को’ई भी यो’ग्‍य व’र न’हीं है. त’भी म’हर्षि वशि’ष्‍ठ ने रा’म से स्‍वयंव’र में हि’स्‍सा लेक’र ध’नुष उ’ठाने के लि’ए क’हा. रा’म ने गु’रु की आ’ज्ञा का पाल’न कि’या औ’र ए’क बा’र में ही ध’नुष को उठा’कर उ’समें प्रत्‍यं’चा च’ढ़ाने ल’गे, लेकि’न त’भी धनु’ष टू’ट ग’या. इ’सी के सा’थ रा’म स्‍वयंव’र जी’त ग’ए औ’र मा’ता सी’ता ने उ’नके ग’ले में वरमा’ला डा’ल दी. मा’न्‍यता है कि सी’ता ने जै’से ही रा’म के ग’ले में व’र मा’ला डा’ली ती’नों लो’क खु’शी से झू’म उ’ठे. य’ही व’जह है कि वि’वाह पं’चमी के दि’न आ’ज भी धूम’धाम से भग’वान रा’म औ’र मा’ता सी’ता का गठ’बंधन कि’या जा’ता है. (Disclaimer: इ’स ले’ख में दी ग’ई जा’नकारियां औ’र सू’चनाएं सा’मान्य जान’कारी प’र आ’धारित हैं. Hindi मीडि’या इन’की पु’ष्टि न’हीं कर’ता है. इ’न प’र अम’ल क’रने से पह’ले संब’धित वि’शेषज्ञ से सं’पर्क क’रें)