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ये है ऐ’से 7 संके’त जो बता’ते है कि अ’ब आप’का ब्रेक’अप हो’ने वा’ला है, क्या आप’के सा’थ भी हो.. तो स’मझ जा’इए हो’ने वा’ला है…

हिंदी खबर

ज’ब दो लो’ग आ’पस में जुड़’ते हैं तो शुरुआ’त में उ’न्हें ए’क दू’सरे के बा’रे में ज्या’दा जान’कारी न’हीं हो’ती. धी’रे-धी’रे प’ता चल’ता है कि सा’मने वा’ला व्य’क्ति कै’सा है. हो स’कता है कि जो आ’पका पा’र्टनर (Partner) हो उ’ससे आप’की ना ब’ने. दो’नों के वि’चार औ’र रह’न-स’हन अल’ग हों या ब’हुत सी बा’तों में दो’नों में मत’भेद हो. शुरुआ’त में आ’प ए’क-दू’सरे को प’संद क’रते हैं, लेकि’न बा’द में रि’श्ते की मि’ठास क’म हो’ने लग’ती है. क’ई बा’र एकसा’थ रह’ना बो’झिल ब’न जा’ता है. ऐ’से में आ’प अ’पने रि’श्ते को बचा’ने की ह’र को’शिश कर’ते हैं, प’र अस’फल हो जा’ते हैं. आप’की पा’र्टनर से छो’टी-छो’टी बा’तों प’र ल’ड़ाई शु’रू हो जा’ती है, ला’इफ बो’रिंग लग’ने लग’ती है, तो ऐ’से रि’श्ते को ढो’ने से अ’च्छा है अल’ग हो जा’ना. स’मस्या ये है कि क’भी-क’भी तो आप’को स’मझ में आ जा’ता है कि अ’ब ब्रेक’अप (Breakup) का सम’य आ ग’या है, लेकि’न फि’र आ’प अ’पने ही फैस’ले को ले’कर कन्फ्यू’ज हो जा’ते हैं औ’र आ’गे न’हीं ब’ढ़ पा’ते, ब’स जबर’दस्ती उ’स रि’श्ते में उल’झे रह’ते हैं.

क’ई बा’र आ’प ए’क अप’मानजनक रि’श्ते को ढो’ते रह’ते हैं. ज’ब आप’को अप’ने रि’श्ते के बा’रे में सो’चकर अ’च्छा मह’सूस हो, खु’शी हो तो स’मझें आ’प स’ही व्य’क्ति के सा’थ हैं. व’हीं अग’र आप’को गु’स्सा आ’ए, तना’व मह’सूस हो या फि’र दु’खी हो जा’एं तो जवा’ब आप’के सा’मने है. अग’र आ’प भी ऐ’से ही ता’ने-बा’ने में फं’से हैं, तो य’हां ह’म आप’को उ’न संके’तों के बा’रे में ब’ता र’हे हैं, जि’नसे आप’को य’ह समझ’ने में आ’सानी हो’गी कि अ’ब ब्रेक’अप का स’मय आ ग’या है.

पा’र्टनर के सा’थ खु’श न’हीं रह’ना
शुरुआ’त में तो स’ब कु’छ बहु’त अ’च्छा ल’गता है. आ’प ए’क-दूस’रे के सा’थ को इन्जॉ’य क’रते हैं, ले’किन बा’द में ह’र छो’टी-छो’टी बा’तों प’र ब’हस, ल’ड़ाई-झग’ड़े का रू’प ले ले तो सम’झें कि ब्रेक’अप का व’क्त आ ग’या है. हालां’कि ऐ’सा न’हीं है कि हे’ल्दी रिलेश’नशिप में क’पल्स के बी’च क’भी लड़ा’ई न’हीं हो’ती, ले’किन इ’सका मत’लब ये न’हीं है कि ए’क सा’थी इमोश’नली रू’प से खु’द को असु’रक्षित महसू’स क’रे.




ज’ब रि’श्ते में श’क पै’दा हो जा’ए
पा’र्टनर प’र विश्वा’स कर’ना कि’सी रि’श्ते का पर’खने के लि’ए ए’क महत्वपू’र्ण क’ड़ी है, क्यों’कि य’ह ह’र रि’श्ते की नीं’व हो’ती है. ज’ब कि’सी रि’श्ते में श’क अप’ने पै’र ज’मा ले’ता है तो उ’से बचा’ना मुश्कि’ल हो जा’ता है. रि’श्ते को ले’कर आ’पका म’न रो’ज कु’छ न कु’छ क’हना चा’हता है. वो इशा’रे कर’ता है कि आ’प गल’त इं’सान के सा’थ अ’पना सम’य ब’र्बाद क’र र’हे हैं, ले’किन आ’प उ’स आ’वाज को द’बा दे’ते हैं या अन’सुना क’र दे’ते हैं.

का’रणों को स्प’ष्ट रू’प से सम’झें
अग’र आप’को ल’गता है कि आ’प जल्दबा’जी क’र र’हे हैं तो अ’पने सा’थी के सा’थ डे’ट प’र जा’ना जा’री र’खें. आ’प फैस’ला ले’ने से प’हले ए’क दो लि’स्ट ब’नाएं. ए’क जि’समें सा’थ रह’ने के कार’ण औ’र दूस’रे में ब्रेक’अप के का’रणों का जि’क्र क’रें. अ’ब दो’नों लि’स्ट को दे’खें औ’र कार’णों की तुल’ना क’रें. इस’के बा’द आ’पको फैस’ला ले’ने में आसा’नी हो’गी

ज’ब दो लो’ग आ’पस में जुड़’ते हैं तो शुरुआ’त में उ’न्हें ए’क दू’सरे के बा’रे में ज्या’दा जान’कारी न’हीं हो’ती. धी’रे-धी’रे प’ता चल’ता है कि सा’मने वा’ला व्य’क्ति कै’सा है. हो स’कता है कि जो आ’पका पा’र्टनर (Partner) हो उ’ससे आप’की ना ब’ने. दो’नों के वि’चार औ’र रह’न-स’हन अल’ग हों या ब’हुत सी बा’तों में दो’नों में मत’भेद हो. शुरुआ’त में आ’प ए’क-दू’सरे को प’संद क’रते हैं, लेकि’न बा’द में रि’श्ते की मि’ठास क’म हो’ने लग’ती है. क’ई बा’र एकसा’थ रह’ना बो’झिल ब’न जा’ता है. ऐ’से में आ’प अ’पने रि’श्ते को बचा’ने की ह’र को’शिश कर’ते हैं, प’र अस’फल हो जा’ते हैं. आप’की पा’र्टनर से छो’टी-छो’टी बा’तों प’र ल’ड़ाई शु’रू हो जा’ती है, ला’इफ बो’रिंग लग’ने लग’ती है, तो ऐ’से रि’श्ते को ढो’ने से अ’च्छा है अल’ग हो जा’ना. स’मस्या ये है कि क’भी-क’भी तो आप’को स’मझ में आ जा’ता है कि अ’ब ब्रेक’अप (Breakup) का सम’य आ ग’या है, लेकि’न फि’र आ’प अ’पने ही फैस’ले को ले’कर कन्फ्यू’ज हो जा’ते हैं औ’र आ’गे न’हीं ब’ढ़ पा’ते, ब’स जबर’दस्ती उ’स रि’श्ते में उल’झे रह’ते हैं.