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या’त्रा प’र नि’कलने से प’हले ज’रूर क’रें ये उपा’य, दुर्घ’टना से ब’चेंगे, स’फल हों’गी या’त्रा, जा’निए क्या है…

धार्मिक खबर

आप’की या’त्रा मंगल’मयी हो। य’ह सुं’दर वा’क्य बो’ला ही इस’लिए जा’ता है कि या’त्रा में क’ई त’रह के वि’घ्न आ’ते हैं ले’किन या’त्री उन’से ब’चा र’हे। हमा’रे ब’ड़े-बु’जुर्ग सला’ह दे’ते हैं कि घ’र से निक’लने से पह’ले कु’छ बा’तों का अव’श्य ध्या’न र’खा जा’ना चा’हिए। प्रस्तु’त है उन’की सला’ह प’र कु’छ खा’स औ’र स’रल बा’तें-

* घ’र से नि’कलने से प’हले घ’र में स्थि’त दे’वता को 2, 5, 11 अग’रबत्ती औ’र शु’द्ध घी का दीप’क लगा’एं। कूं’कु, ह’ल्दी, अ’बीर, गु’लाल, चाव’ल औ’र फू’ल था’ली में रख’कर आर’ती क’रें। भग’वान से या’त्रा के सकु’शल र’हने की का’मना की’जिए। तत्प’श्चात का’ले ति’ल अप’ने ऊ’पर से स्व’यं ही 7 बा’र उता’र क’र उ’त्तर दि’शा में फें’क दें।

* घ’र से निक’लने से पह’ले स्व’र का ध्या’न र’खें। जो स्व’र च’ल र’हा हो स’बसे प’हले उ’सी पै’र को बा’हर निका’लें।

* घ’र से निक’लने से पह’ले शु’भ चौघ’ड़िया ज’रूर दे’खें।

* निक’लते सम’य कु’छ श’ब्दों का उच्चार’ण व’र्जित है- जै’से जू’ता, च’प्पल, ल’कड़ी, ‍कि’सी भी प्र’कार की गा’ली, ता’ला, राव’ण, पत्थ’र, न’हीं, म’रना, डूब’ना, फेंक’ना, छो’ड़कर आ’ना, औ’र को’ई भी नका’रात्मक श’ब्द।

* म’जाक में भी न’दी, आ’ग औ’र ह’वा के बा’रे अपमा’नजनक श’ब्द का प्र’योग ना क’रें। कह’ते हैं ईश्व’र की इ’न ती’न पवि’त्र दे’न से क’भी मजा’क न’हीं क’रना चा’हिए।

* निक’लते स’मय शु’भ श’ब्द, पवि’त्र मं’त्र औ’र मंगल’वचनों का प्र’योग क’रें। प्रस’न्न म’न से या’त्रा के लि’ए निक’लें। क’लह औ’र आं’सू से यथा’संभव ब’चें।

* घ’र में या’त्रा से पह’ले चाव’ल की छो’टी ढे’री प’र क’लश र’खें औ’र स’वा रु’पया रख’कर अग’रबत्ती से आर’ती क’र या’त्रा के नि’र्विघ्न हो’ने की प्रार्थ’ना क’रें। वाप’स आ’कर व’ह रु’पया, चाव’ल औ’र पा’नी शि’व मं’दिर में चढ़ा’एं।

* घ’र से निक’लने से प’हले चिटिं’यों को आ’टा डा’लें, पंछि’यों को दा’ना डा’लें, का’ले कु’त्ते को रो’टी, औ’र गा’य को भी’गा अ’नाज खि’लाएं।

* घ’र के सब’से क’रीब जो मं’दिर हो उ’समें नारि’यल च’ढ़ाएं। कु’छ पै’से दा’न पे’टी के बजा’य मंदि’र में ही क’हीं छुपा’कर र’खें। य’ह गु’प्त दा’न मा’ना जा’ता है, या’त्रा के लि’ए शु’भ फल’दायी सर’ल उपा’य है।

* कि’सी म’हत्वपूर्ण या’त्रा से पह’ले ए’क मध्य’म आ’कार के डि’ब्बे में दा’ल, चाव’ल, आ’टा, श’कर, फ’ल, फू’ल औ’र मिठा’ई र’खें। या’त्रा से पह’ले उ’से कि’सी यो’ग्य पं’डित को दा’न में दे दें। या’त्रा से आ’ने के बा’द उत’नी ही की’मत की द’क्षिणा व’ही पंडि’त को दा’न में दें। सं’भव हो तो घ’र बुला’कर भोज’न क’रवाएं।