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इ’न घ’रों में न’हीं हो’ता मां ल’क्ष्मी का वा’स, जा’निए क्या आ’पका घ’र भी तो न’हीं है इ’समें.. तो ऐ’से क’रें मां ल’क्ष्मी को…

धार्मिक खबर

शुक्र’वार (Friday) की शा’म को मां ल’क्ष्मी (Maa Lakshmi) की पू’जा की जा’ती है. ऐ’सी मान्य’ता है कि शुक्र’वार को वि’धिवत पूज’न से मां ल’क्ष्मी प्र’सन्न हो’ती हैं औ’र जा’तकों प’र ध’न व’र्षा कर’ती हैं. घ’र में सु’ख-शां’ति औ’र स’मृद्धि बना’ए रख’ने के लि’ए लो’ग शुक्रवा’र के दि’न मां ल’क्ष्मी की पू’जा कर’ते हैं. कह’ते हैं कि मां ल’क्ष्मी की पू’जा कर’ने से पै’सों (Money) की क’मी क’भी न’हीं हो’ती है. हालां’कि क’ई बा’र ऐ’सा भी हो’ता है ज’ब का’फी पू’जा-अर्च’ना क’रने के बा’द भी घ’र में बर’कत न’हीं हो पा’ती है. अग’र आ’प भी चाह’ते हैं कि मां ल’क्ष्मी की कृ’पा से आप’के घ’र में आ’र्थिक परे’शानी क’भी न हो तो शुक्र’वार को इ’स वि’धि से मां ल’क्ष्मी की पू’जा क’रें.

पू’जन वि’धि
-घ’र में ऐ’सी त’स्वीर ल’गाएं जि’समें मां ल’क्ष्मी के हा’थों से ध’न गि’र र’हा हो. अ’गर आ’पके हा’थों में पै’सा न’हीं रुक’ता औ’र ब’हुत ज्या’दा ख’र्च हो’ता है तो ऐ’सी तस्वी’र ल’गाएं जिस’में मां ल’क्ष्मी ख’ड़ी हों औ’र उन’के हा’थों से ध’न गि’र र’हा हो.
-मां की तस्वी’र के सा’मने दी’या ज’रूर जला’एं. मां ल’क्ष्मी के सा’मने हमे’शा घी का दी’या ही जला’एं.
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-मां ल’क्ष्मी को इ’त्र चढ़ा’एं औ’र उ’सी इ’त्र का निय’मित इस्ते’माल क’रें.


-अ’गर बेव’जह ध’न ज्या’दा ख’र्च हो र’हा है तो मां के चर’णों में ह’र दि’न ए’क रुप’ये का सि’क्का अ’र्पित क’रें औ’र उ’से ज’मा क’र मही’ने के अं’त में कि’सी सौ’भाग्य की ध’नी स्त्री को दे दें.
अ’गर आप’को अ’क्सर ध’न की परे’शानियों का साम’ना कर’ना पड़’ता है तो संभ’व है कि आ’प भी इन’में से को’ई ग’लती ज’रूर क’र र’हे हों’गे जिस’से दे’वी ल’क्ष्मी आ’पसे नारा’ज हैं.
-जि’न घ’रों में पू’जा का दी’पक फूं’क मार’कर बुझा’या जा’ता है व’हां मां ल’क्ष्मी न’हीं ठह’रती हैं.
-अ’गर आ’प टू’टी हु’ई कं’घी से बा’ल संवार’ते हैं तो य’ह ध’न के लि’ए अप’शगुन मा’ना जा’ता है.
-रा’त में बि’ना पै’र धो’ए सो’ते हैं या गी’ले पै’र ही सो’ने की आ’दत है तो य’ह ध’न के लि’ए अ’च्छा श’गुन न’हीं है.
-अ’गर आ’प रा’त के जू’ठे ब’र्तनों को घ’र में र’खे र’हते हैं औ’र उ’से सु’बह सा’फ क’रते हैं तो इ’स आ’दत को बद’लें. ऐ’सा क’रने से घ’र में ल’क्ष्मी न’हीं ठह’रती हैं.

-अ’गर आप’को नाखू’न च’बाने या दां’तों से का’टने की आ’दत है तो य’ह भी ध’न के लि’ए अ’च्छा न’हीं है. ऐ’सी आ’दत से आ’पका श’रीर हमे’शा जू’ठा हो’ता रह’ता है जि’ससे ल’क्ष्मी मां ना’राज हो’ती हैं.
-जि’न घ’रों में सू’र्यास्त के बा’द झा’ड़ू ल’गाया जा’ता है व’हां ल’क्ष्मी रह’ना प’संद न’हीं कर’ती हैं.
-शा’स्त्रों में बता’या ग’या है कि जि’न घ’रों में पि’तृपक्ष में पित’रों का श्रा’द्ध न’हीं कि’या जा’ता है व’हां ल’क्ष्मी न’हीं रु’कती.
-जि’न घ’रों में निय’मित शं’ख की ध्व’नि न’हीं हो’ती औ’र दे’वी-देव’ताओं के बा’रे में अ’पशब्द क’हे जा’ते हैं व’हां ल’क्ष्मी का क’भी वा’स न’हीं हो’ता है