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जिन’की हो’ती है ऐ’सी ह’थेली, उ’नकी न’हीं र’हती क’भी ति’जोरी खा’ली, दे’खिए क्या आप’की भी…

धार्मिक खबर

लख’नऊ : क’हते हैं व्य’क्ति का भा’ग्य उ’सके हा’थ में हो’ता है।सं’सार ऐ’से ब’हुत से लो’ग हैं जि’नके पा’स सा’री सुवि’धाएं हो’ती हैं। उन’के पा’स कि’सी भी ची’ज की क’मी न’हीं रह’ती  है। ऐ’से लो’गों प’र ल’क्ष्मी की कृ’पा हमे’शा ब’नी रह’ती है। ज्यो’तिष के अ’नुसार ऐ’से लो’गों के हा’थों में वि’शेष स्थिति’यां रह’ती हैं।

हा’थों में भा’ग्य रे’खा

य’दि दो’नों हा’थों में भा’ग्य रे’खा मणि’बंध से प्रा’रंभ हो’कर सी’धी श’नि पर्व’त प’र जा’ती हो त’था सू’र्य पर्व’त पू’र्ण विक’सित, ला’लिमा लि’ए हु’ए हो औ’र उ’स प’र सू’र्य रे’खा भी बि’ना क’टी-फ’टी, पत’ली औ’र स्प’ष्ट हो, सा’थ ही म’स्तिष्क रे’खा, हृद’य रे’खा त’था आ’यु रे’खा स्प’ष्ट हो तो इ’से गज’लक्ष्मी यो’ग क’हा जा’ता है। जि’स व्य’क्ति के हा’थ में य’ह यो’ग हो’ता है व’ह साधा’रण परि’वार में ज’न्म ले’कर भी अ’पने शु’भ क’र्मों से उ’च्च स्तरी’य जीव’नयापन कर’ता है। उस’के जी’वन में सम्‍मा’न की को’ई क’मी न’हीं हो’ती औ’र व’ह स’मस्त ऐ’श्वर्य, सु’ख भोग’ता है।

ते’जस्वी औ’र चुंब’कीय व्य’क्तित्व

जि’स व्य’क्ति के हा’थ में य’ह यो’ग हो’ता है व’ह ते’जस्वी औ’र चुंब’कीय व्य’क्तित्व का ध’नी हो’ता है। उस’के आ’सपास ऐ’श्वर्य औ’र भौ’तिक सु’ख सुवि’धाएं च’ली आ’ती हैं। ए’क से अधि’क साध’नों से आ’य प्रा’प्त क’रता है त’था अ’पने पूर्व’जों से मि’ली सं’पत्ति में वृ’द्धि कर’ने वा’ला हो’ता है। शारी’रिक दृ’ष्टि से ऐ’सा व्य’क्ति आ’कर्षक हो’ता है। विप’रीत लिं’गी व्य’क्तियों की इ’नके जी’वन में भर’मार हो’ती  है।

भा’ग्‍य रे’खा ग’हरी औ’र सा’फ

हथेली का बीच का हिस्सा दबा

अ’गर भा’ग्‍य रे’खा गह’री औ’र सा’फ दि’खाई दे तो ऐ’सा व्य’क्ति बहु’त ईमा’नदार हो’ते है। व’ह आद’र्शवादी हो’ते हैं औ’र जीव’न में ह’र का’म को बेह’तर ढं’ग से कर’ते हु’ए आ’गे बढ़’ते हैं। वे को’ई भी गल’त का’म न’हीं क’रते। ह’र का’म में ईमा’नदारी औ’र आदर्श’वादिता उन’के लि’ए सर्वो’परि हो’ती है। मध्‍य’मा उंग’ली त’क जा’ने वा’ली भा’ग्य रेखा अ’च्‍छी न’हीं मा’नी जा’ती। ऐ’सा व्य’क्ति जीव’न में अने’क गल’ती क’रता है औ’र नुक’सान उठा’ता रह’ता है।

य’दि कि’सी व्य’क्ति के हा’थ में हथे’ली का बी’च का हि’स्सा द’बा हु’आ औ’र ग’हरा हो’ने के सा’थ ही सू’र्य ए’वं गु’रु पर्व’त पु’ष्ट, मज’बूत ए’वं उ’भरे हु’ए हों तो ऐ’से व्य’क्ति व्य’क्तित्व के ब’हुत ही ध’नी हो’ती हैं। उ’नका व्य’क्तित्व बिल्कु’ल अ’लग हो’ता है।य’दि हथे’ली के बी’च का हि’स्सा द’बा हु’आ गह’रा हो, सू’र्य औ’र गु’रु पर्व’त पु’ष्ट, मज’बूत औ’र उभ’रे हु’ए हो, भा’ग्य रे’खा श’नि पर्व’त के मू’ल को छू’ती हो तो हा’थ में शु’भकर्तरी यो’ग बन’ता है।

जा’दुई व्य’क्तित्व औ’र लं’बा जी’वन

ऐ’से लो’गों का व्यक्ति’त्व जा’दुई हो’ता है। इ’स तर’ह के लो’गों के आ’सपास स’मस्त सु’विधाएं हो’ती हैं। उ’न प’र ल’क्ष्मी की कृ’पा बरस’ती रह’ती है।  ऐ’से लो’गों के पा’स क’माई के स्रेा’त भी ए’क से अ’धिक हो’ते हैं। ऐ’से लो’गों को अ’पने पू’र्वजों से जो भी संप’त्ति या ध’न मिल’ता है वे उ’समें नि’रंतर बढ़ो’तरी कर’ते रह’ते हैं।

शा’रीरिक रू’प से भी ऐ’से लो’गों का व्य’क्तित्व आक’र्षक हो’ता है। वि’परीत लिं’गी की ऐ’से लो’गों के जी’वन में लं’बी ला’इन रह’ती है। हालां’कि क’भी-क’भी ऐ’से लो’ग व्य’क्ति घ’मंडी भी हो जा’ते हैं जो इन’के व्य’क्तित्व का नका’रात्मक प’क्ष हो’ता है।