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बं’गाल की इ’स छा’त्रा ने ब’नाया ऐ’सा अ’नोखा च’श्मा, जि’से पह’नकर साम’ने वा’ले को बि’ना क’पड़ों… दे’खें त’स्वीरें….

हिंदी खबर

दुर्गा’पुर, [हृदया’नंद गि’रि]। च’श्मा सा’फ हो तो न’जारे भी सा’फ दिख’ते हैं। य’ह क’हावत हम’लोगों ने क’ई बा’र सु’नी हो’गी। अब इ’स सो’च को आ’गे ले जा’ते हु’ए बं’गाल के पू’र्वी बर्द्धमा’न जि’ले की ए’क छा’त्रा ने सा’बित कि’या है कि च’श्मा खा’स हो तो नजा’रा मनचा’हा भी हो सक’ता है। 12वीं की छा’त्रा दिगं’तिका बो’स ने ए’क अ’नूठा च’श्मा बना’या है, जि’ससे ह’म आ’गे के सा’थ-सा’थ बि’ना सि’र घु’माए पी’छे के भी दृ’श्य दे’ख सक’ते हैं।

इ’स बा’ल विज्ञा’नी की खो’ज की स’भी स’राहना क’र र’हे हैं। इ’से पेटें’ट क’राने का आवे’दन दे दि’या ग’या है। हालां’कि ने’त्र वि’शेषज्ञों का मान’ना है कि ऐ’से कि’सी भी च’श्मे को प्रयो’ग औ”र प्रच’लन में आ’ने या ला’ने से पह’ले प’रीक्षण के दौ’र से गुज’रना हो’गा। मेमा’री में स्थि’त वी’एम इंस्टीट्यूश’न यूनि’ट-दो की छा’त्रा दिगं’तिका बो’स ने बता’या कि उस’ने अप’ने इनो’वेटिव आ’इडिया के त’हत इ’स च’श्मे का निर्मा’ण कि’या है।

इ’से ब’नाने में मह”ज 100 रुप’ये ख’र्च हु’ए हैं। च’श्मे के दो’नों लें’स के अग’ल-ब’गल कमा’नी से अटै’च क’रते हु’ए दिगंति’का ने सि’र के पी’छे के दृ’श्य देख’ने के लि’ए भी दो अ’तिरिक्त लें’स ल’गा दि’ए हैं। ठी’क वै’से ही जै”से गा’डिय़ों के आ’गे दो’नों ओ’र पी’छे के दृ’श्य दे’खने के लि’ए सा’इड मि’रर ल’गे हो’ते हैं।

ऐ’से का’म क’रेगा च’श्मा

आ’म तौ’र प’र ज’ब ह’में अ’पने पी’छे देख’ने की ज’रूरत हो’ती है तो ग’र्दन व शरी’र को पी’छे की ओ’र मोड’ऩा प’ड़ता है। इ’स च’श्मे का प्रयो”ग क’रने प’र सि’र घुमा’ने की जरू’रत न’हीं प’ड़ेगी औ’र बि’ना पी’छे मु’ड़े ही पी’छे की गति’विधियों को दे’खा जा स’केगा। खा’स क’र जं’गल के क्षे’त्र से गुज’रने के दौ’रान ह’म इ’स च’श्मे की म’दद से जंग’ली जान’वरों प’र न’जर र’ख स’कते हैं। दिगं’तिका ने इ’स च’श्मे में उत्त’ल द’र्पण का प्रयो’ग कि’या है।

इ’सकी उ’भरी स’तह प’रावर्तक त’ल का का’म क’रती है, जिस’की अंद’रूनी स’तह प’र पा’लिश च’ढ़ी हो’ती है। परा’वर्तक त’ल प’र पी’छे के दृ’श्य न’जर आएं’गे। क्लि’प के मा’ध्यम से च’श्मे के दो’नों ओ’र ल’गाने के लि’ए दो अ’लग-अ’लग छो’टे-छो’टे दर्प’ण ब’नाए ग’ए हैं, जि’न्हें कि’सी भी च’श्में में अ’लग से अ’टैच कि’या जा स’कता है। दिगं’तिका के अनु’सार सा’मान्य तौ’र प’र म’नुष्य अप’ने सा’मने औ’र बा’एं-दा’एं 124 डि’ग्री के को’ण त’क ही दे’ख पा’ता है।

इ’स च’श्मे की म’दद से से 124 डि’ग्री पी’छे की ओ’र भी दे’खा जा स’केगा। आं’खों के रेटि’ना की हरक’त बढ़ा’ने प’र या शरी’र को थो’ड़ा घुमा’ने प’र इस’से औ’र भी ज्या’दा दे’खा जा सके’गा। दर्प’ण का फो’कस का’फी क’म हो’ता है। इस’लिए आं’ख से डे’ढ़ इं’च की दू’री प’र च’श्मे में इ’से फि’क्स कर’ने की व्य’वस्था की ग’ई है।

सुंदर’वन भ्रम’ण के दौ’रान मि’ली प्रेर’णा

दिगंति’का ने बता’या कि कु’छ सम’य प’हले सुंदर’वन ग’ई थी। व’हां क’ई लो’ग बा’त क’र र’हे थे कि य’हां बा’घ का आ’तंक र’हता है। पी’छे से आक’र कि’सी बा’घ ने हम’ला क’र दि’या तो क्या हो’गा। त’ब इ’स स’मस्या के स’माधान का विचा’र आ’या। इ’सी व’र्ष अक्टूब’र में रि’जनल साइं’स सें’टर भो’पाल ने ऑन’लाइन इनो’वेटिव साइं’स मॉ’डल कां’टेस्ट का आ’योजन कि’या था। इ’समें स’भी ने इ’सकी सरा’हना की।

‘छा’त्रा के इनो’वेशन की सराह’ना कर’ता हूं। य’ह ए’क न’ई सो’च है। वै’से इ’सका प्र’योग कित’ना सफ’ल औ’र आं’खों के लि’ए कि’तना सुर’क्षित हो’गा, य’ह परी’क्षण से त’य हो’गा। आ’म तौ’र प’र इंसा’न साम’ने दो’नों आं’खों से देख’ने का अभ्य’स्त हो’ता है। व्याप’क पै’माने प’र इ’स च’श्मे के इस्तेमा’ल के प’हले इस’का प’रीक्षण हो’ना चा’हिए