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भा’रत के इ’स गां’व में प’ति आ’ज भी अ’पनी प’त्नी के सा’थ न’हीं कर’ते ये का’म, दे’खें अनदे’खी त’स्वीरें….

हिंदी खबर

कवर्धा: उ’त्तर प्र’देश से ले’कर म’ध्य प्रदे’श त’क ल’व जि’हाद प’र ह’र तर’फ शो’र म’चा हु’आ है। माम’ला का’नून बना’कर दो’षियों के खि’लाफ का’र्रवाई कर’ने त’क जा पहुं’चा है। यू’पी में तो न’ये का’नून के त’हत ए’क यु’वक प’र के’स भी द’र्ज हो ग’या है। जि’सके बा’द से ल’व जि’हाद का’नून प’र ब’हस छि’ड़ी हु’ई है।

ऐ’से स’मय में ज’बकि दे’श में ‘ल’व जि’हाद’ को लेक’र तमा’म तर’ह की चर्चा’एं च’ल र’ही हैं, छत्तीस’गढ़ के कव’र्धा वनां’चल में रह’ने वा’ले बैगा’ओं की अ’नोखी प’रम्परा आ’ज भी का’यम है। य’हां के लो’गों के लि’ए ‘ल’व जि’हाद’ बेमा’नी जै’सा है।

क्यों’कि इ’स आदि’वासी स’माज में युवा’ओं को अप’ना जी’वन सा’थी अप’नी म’र्जी से चु’नने की पू’री आ’जादी दी जा’ती है। इ’स मे’ले का आयो’जन बै’गा समा’ज के द्वा’रा ह’र व’र्ष कि’या जा’ता है।

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प’ढ़े -लि’खे यो’ग्य युव’क-युव’तियां ले’ते हैं इ’स मे’ले में हि’स्सा

खा’स बा’त ये है कि इ’स स’माज की शा’दी में यो’ग्य यु’वक-युव’ती भी शा’मिल हो’ती हैं। मे’ले में यु’वा पू’रे उत्सा’ह के सा’थ भा’ग ले’ते हैं। लो’ग पा’रम्परिक नृ’त्य प’र थिर’कते हैं, जि’सके बा’द यु’वा अप’नी पसं’द से अप’ना जीव’नसाथी चुन’ते हैं।

इ’स मे’ले में अ’लग-अ’लग गां’व के बै’गा परि’वार भा’ग ले’ने के लि’ए आ’ते हैं। ए’क गां’व के ल’ड़के वा’ले दो दू’सरे गां’व के लड़’की वा’ले शि’रकत कर’ते हैं। यु’वक-यु’वतियों के द्वा’रा अ’पना जी’वन सा’थी प’संद कर’ने के बा’द बै’गा री’ति-रि’वाज के सा’थ उ’नकी शा’दी क’राई जा’ती है।

ये मे’ला का’फी स’मय पह’ले से च’ला आ र’हा है। पा’रम्परिक प’रिधानों में क’र्मा नृ’त्य के सा’थ हो’ने वा’ला य’ह खा’स आ’योजन बै’गा आदि’वासी समु’दाय की पहचा’न ब’न ग’या है। खास’कर शा’दी क’रने की चाह’त ले’कर आ’ने वा’ले यु’वक औ’र युवति’यों को तो इ’स मे’ले का इंत’जार रह’ता है।

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गां’व के लो’ग उठा’ते हैं मेहमा’नों के खा’ने-पी’ने से ले’कर मे’ले का ख’र्च

बै’गा स’माज के रा’म खिला’वन ब’ताते हैं कि इ’स मे’ले में आ’कर ही यु’वा अ’पना जी’वन सा’थी चु’नते हैं, जि’सके सा’थ वे आ’गे च’लकर अप’ना पू’रा जीव’न व्य’तीत कर’ते हैं।

लो’गों को पह’ले ही इ’स मे’ले के आयो’जन की जान’कारी दे दी जाती है, जिस”से कि लो’ग स’भी तैया’री के सा’थ मे’ले में आ’ये। ये मे’ला जि’स भी गां’व में लग’ता है, व’हां के लो’ग मेह’मानों के खा’ने-पी’ने का पू’रा प्र’बंध क’रते हैं।