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ल’ड़कों को प’संद आ’ती है ऐ’सी लड़’कियां, जि’नमें हो’ती है ये 6 आद’तें, जा’निए क्या आ’प में भी है ये…

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लड़’कों को लड़’कियों का रू’प-रं’ग तो प्रभा’वित कर’ता ही है ले’किन रू’प-रं’ग तो सि’र्फ आक’र्षण का माम’ला हो’ता है। ज’ब पसं’द की बा’त आ’ती है तो लड़’के भी लड़कि’यों में क’ई सा’रे गु’ण देख’ते हैं। लड़’के भी चा’हते हैं कि वे कि’सी ऐ’सी ल’ड़की का हा’थ था’में जो रि’श्ते में संतु’लन बना’कर उ’नके सा’थ आ’गे ब’ढ़े। य’ही वज’ह है कि ल’ड़के ज’ब क’रीब से लड़’कियों को जा’नने का प्रया’स कर’ते हैं तो वे उन’की व्यवहा’रिकता, सो’च, परि’पक्वता आ’दि गु’णों को पर’खते हैं। अग’ली स्ला’इड्स के मा’ध्यम से जा’निए वो कौ’नसी 5 आद’तें हैं जो य’दि लड़’की में हो तो लड़’के उ’न्हें झ’ट से प’संद क’र ले’ते हैं।

परि’वार औ’र दो’स्तों का मा’न रख’ने वा’ली
जो लड़’कियां ल’ड़कों के सा’थ उन’के परि’वार औ’र दो’स्तों को भी स्वी’कार ले’ती हैं, उन’के घ’र- परि’वार को अप’ना मा’नने ल’गती हैं, ऐ’सी लड़’कियां लड़’कों का दि’ल ब’हुत ज’ल्दी जी’त ले’ती हैं। क’ई सा’री लड़’कियां लड़’कों के दो’स्तों को प’संद न’हीं क’रती हैं, उ’नका उप’हास ब’नाती हैं ऐ’सी लड़’कियां ल’ड़कों को चिढ़’चिढ़ा ब’ना दे’ती हैं औ’र लड़’के ज्या’दा दि’न त’क उन’के सा’थ न’हीं र’ह पा’ते हैं। 

अ’तीत को न ला’ती हो बी’च में
क’ई सा’री लड़कि’यां अ’तीत से जु’ड़ी बा’तें निका’लकर या लड़’कों को पु’राने रि’श्तों से जु’ड़े ता’ने मा’रकर ए’क अ’जीब कि’स्म का आ’नंद प्रा’प्त क’रती हैं। ल’ड़कों को ऐ’सी लड़’कियां बि’ल्कुल भी प’संद न’हीं आ’ती हैं। वे सम’य रह’ते ऐ’सी लड़कि’यों से दू’री बना’ना प’संद कर’ते हैं क्यों’कि ये लड़’कियां उन’की मान’सिक से’हत को प्रभा’वित क’रती हैं।

श’क न कर’ने वा’ली
जो लड़’कियां ल’ड़कों को समझ’ती हैं, बि’ना बा’त के उ’न प’र श’क न’हीं कर’ती हैं, ल’ड़के ऐ’सी लड़’कियों का बहु’त सम्मा’न कर’ते हैं। बा’त-बा’त प’र श’क क’रने वा’ली, बह’सबाजी क’रने वा’ली लड़कि’यां लड़’कों को सि’रदर्द से क’म न’हीं लग’तीं क्यों’कि य’ह लड़’कियां अन’जाने में लड़’कों के चरि’त्र प’र ऊं’गली उ’ठाती हैं।

प’र्सनल स्पे’स दे’ने वा’ली
ह’र व्य’क्ति की अप’नी पर्स’नल स्पे’स हो’ती है औ’र जो लड़’कियां इ’स बा’त को सम’झते हु’ए लड़’कों को प’र्सनल स्पे’स दे’ती हैं, लड़’के उ’न लड़कि’यों का दि’ल क’भी न’हीं तो’ड़ते औ’र जो लड़कि’यां लड़’कों को दिन’भर फो’न कर’के तं’ग कर’ती र’हती हैं, ल’ड़के ए’क सम’य प’र उ’नसे ऊ’ब जा’ते हैं औ’र दू’र हो’ने लग’ते हैं। 

आ’त्मनिर्भर
लड़’कों को आत्म’निर्भर लड़’कियां बहु’त ज’ल्दी प्रभा’वित कर’ती हैं क्यों’कि आत्मनि’र्भर लड़’कियां परि’पक्व भी हो’ती हैं जो कि ह’र प’रिस्थिति को समझ’ने औ’र संभा”लने में स’क्षम हो’ती हैं। आत्मनि’र्भर लड़कि’यों के आ’गे ल’ड़के अप’नी बा’तें रख’ना पसं’द कर’ते हैं क्यों’कि वे जा’नते हैं कि वे उ’स बा’त को अ’च्छे से सम’झेंगी औ’र स’ही स’लाह भी दें’गी।